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Diwali 2025: नरक चतुर्दशी पर मनाई जाएगी छोटी दीपावली, मेष लग्न में पूजन का मुहूर्त शाम को; जानें टाइम

Sun, 19 Oct 2025 05:31 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Narak Chaturdashi 2025: नरक चतुर्दशी पर पूजन मुहूर्त मेष लग्न में सायं 05:33 मिनट से रात्रि 07:10 मिनट तक रहेगा।  उदयातिथि के अनुसार यह पर्व 19 अक्तूबर को मनाया जाएगा। 
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नरक चतुर्दशी 2025 यम दीप जलाने का शुभ मुहूर्त। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर छोटी दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। इसे रूप चौदस, काली चौदस और नरक निवारण चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सौंदर्य, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।

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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि नरक चतुर्दशी की शुरुआत 19 अक्तूबर को अपराह्न 01:55 मिनट पर होगी। समापन  20 अक्तूबर को अपराह्न 02:56 मिनट पर होगा। 

काशी से रामनगरी भेजे गए 20 लाख दीये मुंबई और नागपुर गए 15 लाख
वाराणसी। दीपावली से पहले ही काशी में बने मिट्टी के दीये देश और प्रदेश के अलग-अलग शहरों में भेजे जा रहे हैं। 20 लाख दीये रामनगरी अयोध्या तो 15 लाख से ज्यादा मुंबई, नागपुर भेजे जा चुके हैं। पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में भी 50 लाख से दीये भेजे जा रहे हैं। इसी तरह देव दीपावली पर घाटों को सजाने के लिए भी 70 लाख से ज्यादा दीये तैयार हो रहे हैं। 

बनारस में दीये और पूरवा का बड़ा कारोबार है। 10 हजार से ज्यादा कुम्हार दीये बना रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक, दिवाली और देव दीपावली पर दो करोड़ से ज्यादा दीये भेजे जाते हैं। दरेखू के अशोक प्रजापति ने बताया कि दीये की मांग अच्छी है। 50 हजार दीये प्रयागराज और हंडिया भेजे जाने हैं। अभी तक 10 हजार दीये तैयार कर पाए हैं। कुंवर प्रजापति को करीब 10 हजार दीये के ऑर्डर मिले हैं। बेचू प्रजापति ने बताया कि स्वास्तिक चिन्ह वाले दीये की मांग ज्यादा है।
बनारस से दीये बाहर भेजे जा रहे हैं। दिवाली के लिए अयोध्या के अलावा मुंबई, कोलकाता, गोरखपुर, प्रयागराज आदि शहरों में दीये भेजे गए हैं। खूब ऑर्डर मिले हैं। दीये 60 रुपये सैकड़ा मिल रहे हैं। 50 से 200 रुपये सैकड़ा पुरवा, घड़िया तीन से पांच प्रति नग बिक रहे हैं। दिवाली पर ऑनलाइन दीये की भी मांग है। डिजाइनदार दीये भी बिक रहे हैं। -रामराज प्रजापति, अध्यक्ष, कुम्हरी कला 

पूर्वांचल के 4753 कुम्हारों की दिवाली रोशन इलेक्टि्रक चाक से सात गुना बढ़ा उत्पादन
इलेक्ट्रिक चाक से दीयों का उत्पादन करीब 7 गुना बढ़ गया है। कुम्हार डिजाइनर दीये के साथ ही अन्य मिट्टी के सामान भी बना रहे हैं। उनकी सेहत भी भी सुधरी है। इलेक्ट्रिक चाक योजना के जरिये वाराणसी मंडल के 4,753 कुम्हारों को स्वरोजगार से जोड़ा गया है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग कार्यालय के अनुसार, वित्तीय वर्ष -2016 -17 से अब तक वाराणसी मंडल में 4,753 कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक दिए गए हैं। एक चाक की कीमत करीब 13 हजार रुपये है लेकिन इसे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले कुम्हारों को मुफ्त दिया जाता है। अन्य को 20 फीसदी भुगतान पर उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना ने कुम्हारों को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि उनकी सेहत और कार्यक्षमता को भी बेहतर किया है। 
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इलेक्ट्रिक चाक से स्वास्थ्य, आमदनी और उत्पादकता में सुधार
कुम्हार विकास प्रजापति ने बताया कि यह इलेक्ट्रिक चाक हमारे लिए सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली का जरिया है। पहले पारंपरिक हाथ से चलने वाले चाक पर काम करना शारीरिक रूप से थकाऊ और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक था। हाथ, कंधे और सीने में दर्द, साथ ही जख्मों की समस्या आम थी। 

पहले दिन में केवल दो घंटे काम हो पाता था, बाकी समय आराम में चला जाता था, लेकिन इलेक्ट्रिक चाक ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। अब परिवार के सभी सदस्य मिलकर 10-12 घंटे आसानी से काम कर लेते हैं। बिहारी प्रजापति ने कहा कि बड़े ऑर्डर आसानी से पूरे कर लेते हैं। 
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