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बीएचयू के हॉस्टल में रह कर छात्र और पूर्व छात्र चुराते थे वाहन, तीन बोलेरो बरामद

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वाराणसी। बीएचयू के राजाराम हॉस्टल में रह कर छात्र और पूर्व छात्र अपने दोस्तों के साथ शहर से चार पहिया वाहन चुराते थे। चोरी के वाहनों से शराब तस्करी करते थे और फिर उन्हें बिहार में बेच देते थे। पुलिस ने एक छात्र सहित चार आरोपियों को चोरी की तीन बोलेरो के साथ शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की शिनाख्त झारखंड के पलामू निवासी बीएचयू के एमए (एंथ्रोपोलॉजी) के छात्र अविनाश सिंह, बीएचयू से बीकॉम उत्तीर्ण बिहार के कैमूर के विशाल सिंह और बक्सर के जीतू कुमार व अभिषेक कुमार ओझा के तौर पर हुई है। प्रकरण में छह छात्रों व पूर्व छात्रों की लंका थाने की पुलिस को तलाश है।
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एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इंस्पेक्टर लंका भारत भूषण तिवारी को सूचना मिली थी कि कुछ लोग चोरी के वाहन के साथ भगवतीपुर में मौजूद हैं। वाहनों की नंबर प्लेट बदलने का काम किया जा रहा है। इस सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर लंका ने इंस्पेक्टर अपराध मोहित लाल यादव और एसआई अमरेंद्र कुमार पांडेय, शशि प्रताप सिंह, रवि यादव व उपेंद्र यादव की टीम को मौके पर भेजा। पुलिस टीम ने फर्जी नंबर प्लेट लगी चोरी की तीन बोलेरो के साथ चार युवकों को गिरफ्तार किया। चारों ने स्वीकार किया कि हाल के दिनों में उनके गिरोह ने लंका और मंडुवाडीह थाना क्षेत्र से 13 चार पहिया वाहन चुराया है। चोरी के वाहनों को बेचने से जो पैसा मिलता था उसे वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ही मौजमस्ती में खर्च करते थे। इसके अलावा जिन लोगों की मदद से राजाराम हॉस्टल में रहते थे, उन पर भी पैसा खर्च करने के साथ ही उन्हें आए दिन पार्टी देते थे। चारों के खिलाफ लंका और मंडुवाडीह थाने में चार मुकदमे दर्ज हैं।
इनसेट
मारपीट में भूमिका, सफेदपोशों का संरक्षण
राजाराम हॉस्टल में रहने वाले इस वाहन चोर गिरोह के सदस्यों को सफेदपोशों का संरक्षण मिला हुआ था। छात्रों को शराब पिलाने, पैसे देने और मारपीट के लिए उकसा कर आए दिन उपद्रव कराने में भी इनकी अहम भूमिका रहती है। इंस्पेक्टर लंका भारत भूषण तिवारी ने बताया कि गिरफ्तार अभिषेक चोरी के वाहनों में भदोही में शराब लोड कराता था। 1000 रुपये प्रति बोतल की शराब अभिषेक 1300 में खरीद कर उसे बिहार में 1500 से 1600 बेचा जाता था। इस काम में अभिषेक का साथ कुछ शराब ठेके के ठेकेदार देते थे। शराब लदी गाडि़यों को बिहार के बक्सर पहुंचाने का काम जीतू के जिम्मे था। शराब की खेप बिहार पहुंचाने के बाद चोरी के वाहन को बेच दिया जाता था।
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