वाराणसी। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने शनिवार को कछुआ सेंचुरी का जायजा लिया। दशाश्वमेध से मणिकर्णिका और अस्सी घाट तक नाव से भ्रमण किया। गंगा के उस पार जमा बालू के टीले को भी देखा। इस दौरान आला अधिकारियों से कहा कि यह वाकई में बड़ी समस्या है। इसे हटवाने की दिशा में काम किया जाए ताकि यहां के लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम की सराहना की और उसे सुव्यस्थित करने में भी सहयोग का आश्वासन दिया।
अधिकारियों को उम्मीद थी कि सुबह मुख्य सचिव मंडुवाडीह आरओबी या सामनेघाट पुल का निरीक्षण करने जाएंगे। मगर वाराणसी दौरे के दूसरे दिन शनिवार की सुबह विश्वनाथ मंदिर में सपत्नीक बाबा का दर्शन पूजन करने पहुंचे। वहां से दशाश्वमेध घाट आए और नाव पर सवार होकर मणिकर्णिका घाट पहुंचे। वहां से अस्सी घाट तक निरीक्षण किया। गंगा के उस पार जमा बालू के टीले के बारे में अधिकारियों
से पूछताछ की। कछुआ सेंचुरी की बाबत जानकारी हासिल की और कहा कि जनप्रतिनिधियों ने ठीक ही कहा था। कछुआ सेंचुरी के चलते यहां कई तरह की दिक्कतें दिख रही हैं। इसे हटाने के लिए जो भी बन पड़े किया जाना चाहिए। बता दें कि शुक्रवार को मुख्य सचिव से कछुआ सेंचुरी को हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि इसके चलते काशी का विकास कार्य बाधित हो रहा है।
वे नाव से ही अस्सी घाट पहुंचे, जहां सुबह-ए-बनारस का कार्यक्रम चल रहा था। वे पूरे समय तक वहां मौजूद रहे। आरती और संगीत का आनंद उठाने के बाद वहां की विजिटर बुक में अपना कमेंट भी लिखा। सुबह ए बनारस को और भव्यता देने की बात लिखी। अधिकारियों से कहा कि सरकार इस प्रकार के आयोजन को बढ़ावा देगी। उनकी पत्नी ने लिखा कि ‘ईश्वर की सभी नेमत है इस काशी में
और सुबह ए बनारस हमें ब्रह्म मुहूर्त के तुरन्त बाद यहां की पवित्रता और सुंदरता का अनुभव कराता है’। आयोजन समिति की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया। जिले के विकास कार्यों के लिए मुख्य सचिव ने डीएम प्रांजल यादव की तारीफ की। सर्किट हाउस में विदाई समारोह के बाद मुख्य सचिव पुलिस लाइन से हेलीकाप्टर से भदोही रवाना हो गए।