यहीं के अरुण कुमार भारती पुत्र बीर बहादुर भारती पर करीब छह माह पहले लड़की भगाने का आरोप लगा जिसकी पंचायत थाना परिसर में स्थित मंदिर में दोनों के माता-पिता के समक्ष हुई और दोनों की शादी थाना परिसर में ही मंदिर में कराई गई।
इसके बाद वर पक्ष के द्वारा घर पर भी शादी की रस्में पूरी करते हुए नाते रिश्तेदारों को भोज भी कराया गया। इन सभी ने बुधवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह समारोह में उपस्थित होकर योजनाओं का लाभ उठाया। इसी क्रम में चाईछपरा निवासी सुग्रीव पुत्र सुरेंद्र चौधरी की शादी फतेह राय के टोला निवासी गोपाल चौधरी की बेटी पूनम के साथ 19 जून को हुई थी। इसके लिए निमंत्रण कार्ड भी बांटा गया था।
यहीं की विद्यावती पत्नी उमा यादव ने बताया कि मेरी दो बेटियों कुमारी रेनू और कुमारी मंजू की शादी 14 मई को आंगन के मंडप से हुई थी। लेकिन जब कुछ लोगों ने कहा कि शादी अनुदान के लिए दोबारा शादी कर दो तो हमने दोनों बेटियों की शादी के लिए फार्म भरा था, लेकिन विभाग ने केवल एक बेटी कुमारी रंजू का ही आवेदन स्वीकार किया और दोबारा शादी 26 जून को समारोह में गोपालनगर निवासी प्रिंस कुमार के साथ हुई।
चाई छपरा निवासी लालबच्चा चौधरी ने बताया कि मैं अपनी बेटी सलिता चौधरी की शादी 11 जून को ही कर दिया था। अब दोबारा मुख्यमंत्री सामूहिक योजना में विवाह हुआ है तो इसकी जानकारी हमें नहीं है। यदि लड़के वाले शादी कराए हैं तो वो जानें।
कई समाजसेवी व आचार्य भी खोल रहे राज :
बैरिया। द्वाबा के विख्यात धार्मिक स्थल पर गरीब कन्याओं की सामूहिक शादी समारोह के नाम पर समाजसेवियों व आम जनमानस के भावनाओं से भी खिलवाड़ किया गया है। सामूहिक शादी समारोह में दर्जनों समाजसेवियों ने गरीब कन्याओं के लिए सहयोग के रूप में सामग्री से लेकर आर्थिक भी सहयोग किया है। लेकिन इन समाज सेवियों को पता चला कि जिन कन्याओं को आशीर्वाद देने के लिए वह पहुंचे हैं, इनमें कई को तो पहले ही निमंत्रण पर जाकर शादी के दौरान आशीर्वाद दे चुके हैं। आचार्य सत्येंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि कई जोड़ों की शादी तो मैं पहले ही लग्न के मुहूर्त में वैदिक रीति रिवाज से करा चुका हूं।
जहां लोग झूठी कसम खाने से डरते हैं, वहां भी परहेज नहीं :
लालगंज। जिस सिद्ध पीठ पर लोग झूठी कसम खाने से भी डरते हैं उसी स्थान पर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में झूठ के सहारे सरकारी लाभ के लिए गलत रूप से शादियां कराने से पीछे नहीं हट रहे हैं। लोगों की मानें तो इस तरह का खेल हर बार किया जाता है और अधिकारी इस पर परदा डाले रहते हैं। अगर अब तक हुई शादियों की सही जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। उधर, इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह आदि नेताओं व समाजसेवियो सरकार से इस प्रकरण के निष्पक्ष जांच की मांग की है।
खंड विकास अधिकारी पीके सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के आवेदन फार्म की जांच ग्राम पंचायत के सचिव से कराने के बाद ही संस्तुति की गई थी। जांच में खामी मिलने पर 44 आवेदनों को निरस्त भी किया गया था। इसके बाद जिन जोड़े की शादी हुई है उसमें भी खामी मिल सकती है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।