काशी में गंगा में चिकन बिरयानी की इफ्तारी करने वालों को जेल भेज दिया गया है। पुलिस जब आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची तो वे उलझ पड़े और मारपीट करने पर उतारू होने लगे। पंचगंगा घाट के सामने का यह मामला 16 मार्च की शाम का है।
पुलिस को पता चला था कि पंचगंगा घाट के सामने गंगा में 16 मार्च की शाम मोटरबोट पर चिकन बिरयानी की इफ्तारी की गई और हड्डियां गंगा में फेंकी गईं। मामले में कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को सुबह गायघाट से 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और गंगा में प्रदूषक अवशेष फेंकने समेत अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मोटरबोट मालिक और चालक के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज हुई है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों ने पुलिसकर्मियों से नोकझोंक की है। ऐसी घटना पहली बार हुई और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल ने बताया कि आरोपियों में दशाश्वमेध थाना क्षेत्र के मदनपुरा निवासी मो. अव्वल, अजाद अली, मो. समीर, औसानगंज राजापुरा निवासी मो. अहमद उर्फ राजा, बलुवावीर आदमपुर निवासी नूर इस्माइल, मदनपुरा निवासी मो. फैजान, मो. अहमद, मो. तहसीम, महफूज आलम, मो. तौसीफ अहमद, आमिर कैफी, नेहाल अफरीदी, मो. अनस और दानिश सैफी है।
एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच की गई। इसमें मोटरबोट पर गंगा में इफ्तार पार्टी करने का मामला सामने आया। पता चला कि चिकन बिरयानी खाने के बाद प्रदूषक अवशेषों को गंगा में फेंक कर धर्म विशेष के लोगों को आहत करने का प्रयास किया गया। धार्मिक, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हुई। इस मामले में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
पुलिस को सूचना मिली कि इफ्तार पार्टी में शामिल सभी आरोपी गायघाट की तरफ जा रहे हैं। पुलिस की टीमें पहुंचीं और वायरल वीडियो से फोटो मिलान कर तस्दीक कराई जाने लगी। इस बीच आरोपी पुलिस की टीम से उलझ गए। नोकझोंक करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। पुलिस ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी नहीं माने। बाद में 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों को एसीजेएम की अदालत में पेश किया गया जहां से न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
प्राथमिकी में नाम बढ़ाए गए
एसीपी के मुताबिक, भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल की तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब सभी आरोपियों की पहचान हो चुकी है। इन सबके नाम प्राथमिकी में दर्ज किए जा चुके हैं।
इफ्तार एक शुद्ध धार्मिक कार्य है। यह पिकनिक नहीं है। इफ्तार के बाद तुरंत मगरीब की नमाज जरूरी है। आरोपियों ने इस्लाम का बदमान करने का मौका दिया है। इसकी जितनी निंदा की जाए वह कम है।
- एसएम यासीन, सचिव, अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी, वाराणसी