सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ मंगलावर को नहाय खाय के साथ प्रारंभ हो जाएगा। इसको लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। दिवाली के 6 दिन बाद होने वाले छठ महापर्व की रौनक बाज़ारों, दुकानों और रेलवे स्टेशनों पर नज़र आने लगी है।
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पूर्वाचल का बेहद खास और एहम पर्व छठ कई मायनों में खास होता है। रविवार को बड़ी संख्या में व्रती महिलाओं ने गंगा घाट के साथ-साथ, सूर्य सरोवर सहित अन्य तालाबों और कुंडों के समीप वेदियां बनाकर अपनी जगह आरक्षित की। सबसे पहले साफ-सफाई की गई और उसके बाद वेदियां तैयार की जा रही हैं।
सामनेघाट, नगवां, मलहिया के कच्चे घाट पर व्रती महिलाएं और उनके परिवारीजन वेदी बनाते दिखे। लोग अपनी सुविधा और जगह के आधार पर अपना स्थान आरक्षित करते दिखे। डीजल रेल इंजन कारखाना के आवासीय परिसर में भी छठ पूजा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में भक्त जुटे नजर आए।
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यहां छठ पूजा के लिए सूर्य सरोवर पर डीरेकवासियों के साथ आसपास से भरी भीड़ जमा होती है। सुरक्षा के मद्देनजर सरोवर पर चारों तरफ पाइप से घेरा बनाया गया है। अर्घ्यदान के समय यहां एनडीआरएफ की टीम तैनात रहेगी।
लुभा रहे पीतल के खास डिजाइनर सूप
बनारस में निर्मित पीतल के डिजाइनर सूप ज्यादा बिक रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक पीतल निर्मित डिजाइनर सूप की मांग बिहार और झारखंड से लेकर कई अन्य प्रांतों तक है। इसी सूप में पूजन सामग्री रखकर व्रती महिलाएं छठ मइया का पूजन-अर्चन करती हैं। विक्रेता रोहन पटेल ने बताया कि इसकी कीमत तीन सौ से लेकर सात सौ रुपये तक है।
बाजार में अब डाला छठ की खरीदारी से रौनक
छठ के लिए बाजार में दउरी, सूप की खरीदारी करतीं महिलाएं।
सूर्य उपासना के महापर्व डाला छठ की खरीदारी से बाजार में रविवार को खासी रौनक दिखी। जगह-जगह पूजन सामग्रियों की दुकानें सज गई हैं। एक से एक डिजाइनर सूप के अलावा दउरा, टोकरियों की मांग अधिक है। पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटीं महिलाओं ने देर शाम तक खरीदारी की। दशाश्वमेध, विश्वेश्वरगंज के अलावा फल बाजारों में भीड़ अधिक रही। कारोबारियों के मुताबिक अगले दो-तीन दिन खरीदारी में और तेजी आने की उम्मीद है।
शहर में छठ पूजन के मद्देनजर विश्वेश्वरगंज, दशाश्वमेध, चेतगंज, लक्सा, लंका और सुंदरपुर सहित कई अन्य स्थानों पर बाजार सजा है। पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में छठ पूजन से जुड़ी सामग्रियों की बढ़ती खरीदारी के चलते कारोबारियों ने खासी तैयारी की है। पूजन सामग्री की कई अस्थाई दुकानें भी सजी हैं।
ग्राहकों की बदलती पसंद और बदलते दौर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइनर सूप के अलावा आकर्षक रैपर वाली फल से भरी टोकरियां भी बाजार में हैं। फल विक्रेता कुलदीप ने बताया कि सजीले पैक वाली टोकरियों की कीमत फलों की संख्या के हिसाब से अलग-अलग है। बांस के पारंपरिक सूप, दउरी के साथ ही इस बार रंगीन और डिजाइनर सूप, दउरी की भी बाजार में जबरदस्त मांग है।
बांस से बनी सूपेली, डलिया और दउरी की खरीदारी देर शाम तक होती रही। फल बाजार भी गुलजार हैं। आम तौर पर बाजारों में नजर नहीं आने वाले कई तरह के जंगली फल भी दुकानों पर हैं। पुराना पुल के मुन्ना लाल सोनकर और चंद्रा चौमुहानी के सुरेश ने बताया कि छठ पर फलों की मांग सबसे अधिक होती है। इस कारण फलों के दाम बीस फीसदी तक बढ़ गए हैं।
भोजपुरी न आती हो फिर भी समझ आती छठ गीत
वाराणसी में छठ
केरवा जे फ रेला घवद से/ ओह पर सुगा मेडराय.., आदित लिहो मोर अरघिया, दरस देखाव ए दीनानाथ...। उगिहैं सुरुजदेव...। हे छठी मइया तोहार महिमा अपार... कांचहिं बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय... जैसे छठ गीतों से गली-चौबारे गूंजने लगे हैं। आधुनिकता के दौर में भी छठ पूजन के इन पारंपरिक गीतों की लोकप्रियता में तनिक भी कमी नहीं आई है।
लोक आस्था के महापर्व छठ के गीतों का अपना अलग बाजार है और अपनी अलग लोकप्रियता। इस बार भी कई कलाकारों ने छठी माई के गीतों की सीडी बाजार में उतारी है। यूट्यूब और एप पर भी छठ गीतों की शृंखलाएं उपलब्ध हैं। इस बार शारदा सिन्हा, देवी, मालिनी अवस्थी, कल्पना, मनोज तिवारी, पवन सिंह, छैला बिहारी, अजीत कुमार अकेला आदि कलाकारों की स्वरलहरियों से सजे गीतों की मांग अधिक है।
शारदा सिन्हा, अनुराधा पौडवाल एवं कल्पना के गीत ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। उनकी सीडी, डीवीडी भी बिक रही है। जानी-मानी लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा ने कहा कि छठ गीतों की पारंपरिक धुन इतनी मधुर है कि जिसे भोजपुरी बोली समझ में न आती हो तो भी उसे गीत सुंदर लगता है। यही कारण है कि इस पारंपरिक धुन का इस्तेमाल सैकड़ों गीतों में हुआ है।
छठ की परंपरा बहुत पुरानी है और इस पर्व को बहुत पवित्रता से मनाया जाता है। इस पर्व के गीतों में भी शुद्धता और सात्विकता की जरूरत है। हमारी संस्कृति को बनाए रखने के लिए ऐसी धुनें बनाने वालों, इन्हें श्रद्धा से गाने वालों और पूरे मन से सुनने वालों की जरूरत है।
डाला छठ के चलते फलों की खपत बढ़ने के साथ ही उनकी आवक में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है। पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी पहड़िया में फलों की आवक पांच गुना से अधिक बढ़ गई है। फल बाजार में आई तेजी से कारोबारी उत्साहित हैं। उनके मुताबिक इस बार छठ पर्व पर दस करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार की उम्मीद है।
नवराद्घ के बाद डाला छठ दूसरा बड़ा पर्व है जब फलों की खपत सबसे अधिक होती है। पिछले साल डाला छठ पर यहां सात से आठ करोड़ का कारोबार हुआ था। इस बार खपत बढ़ने के साथ ही कारोबार में बीस से पच्चीस फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।
आम दिनों में मंडी में अनार, संतरा और अनानास की आवक जहां चार से छह गाड़ी होती है वहीं इन दिनों बढ़कर आठ से 12 गाड़ी हो गई है। पिछले साल की तुलना में फलों के दाम औसतन इस बार पांच से दस फीसदी कम हैं।
पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से थोक खरीदारी यहां मंडी पहुंच रहे हैं। पहड़िया मंडी के अध्यक्ष किशन सोनकर का कहना है कि पिछले एक दशक में डाला छठ पर फलों के कारोबार में पांच गुने का इजाफा हुआ है। पिछले साल इस बार फल सस्ते हैं। पिछले साल सेब इस समय 100 रुपये प्रति किलो था, इस बार 60 से 70 रुपये है।