रामनगर में पांच से हजारों परिवार तक पहुंचा पर्व
रामनगर में छठ पर्व का चलन हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। कुछ साल पहले तक कुछ परिवार ही छठ का व्रत रखते थे। अब हर मुहल्ले में डाला छठ के गीत गूंजते हैं। पहले सिर्फ काशीराज घराने और उनसे जुड़े परिवार ही छठ मनाते थे। काशीराज परिवार की महिलाएं खुद तो घाट पर नहीं जाती थीं, लेकिन उनका डाला जरूर पहुंचता था। आज भी यह परंपरा जारी है। इस परिवार के लिए बलुआघाट पर आज भी जगह आरक्षित रहती है। सिर्फ बलुआ घाट पर ही डाला छठ पूजन का आयोजन होता था, लेकिन अब सभी घाटों पर व्रती महिलाओं और उनके परिवारों की भीड़ होती है।
पालिकाध्यक्ष रेखा शर्मा की देखरेख में कर्मी बलुआ घाट को ठीक करने में जुटे रहे। विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने शनिवार सुबह बलुआ घाट, रामबाग पोखरे का निरीक्षण किया।
गंगा घाटों पर हुई बैरिकेडिंग, बने चेंजिंग रूम
गंगा घाटों पर नगर निगम ने शनिवार को बैरिकेडिंग कराई। पक्के घाटों से सिल्ट की सफाई हुई। अधिक भीड़ वाले घाटों को सूखा छोड़ा गया। ताकि लोगों के आवागमन और पूजा पाठ में समस्या ना हो। निदेशक सूडा यशु रस्तोगी, नगर आयुक्त प्रणय सिंह ने घाटों का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
घाटों पर चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। पूजा के दिन मोबाइल टायलेट और पेयजल के लिए दस टैंकर लगाए जाएंगे। नगर आयुक्त ने बताया कि घाटों पर 326 डस्टबिन लगाए गए हैं। दशाश्वमेध, अस्सी, केदारघाट, राजघाट, सिंधिया और कामेश्वर घाट पर अर्पण कलश लगाया गया है।