तीन बार झुककर चीफ जस्टिस ने किया था अभिवादन
महामना के प्रपौत्र गिरिधर मालवीय ने बताया कि हालांकि महामना ने पिछले पंद्रह साल से वकालत छोड़ कर गाउन न पहनने का संकल्प लिया था। वह बनारस में रहकर बीएचयू की स्थापना की तैयारी में लगे रहे। जब इन सेनानियों को फांसी की सजा सुनाने की जानकारी मिली तो महामना किसी तरह मुकदमा लड़ने को तैयार हुए। फिर तो हाईकोर्ट में ऐसी बहस हुई कि वह भी इतिहास बन गया।
तत्कालीन चीफ जस्टिस ग्रीम हुड नीर्यस ने बहस के दौरान तीन बार झुककर महामना का अभिवादन भी किया। बहस पूरी हुई तो चीफ जस्टिस ने फैसला तो सुरक्षित कर लिया लेकिन महामना से इतना जरूर कहा कि मुझे नहीं लगता है कि जितनी अच्छी बहस आपने की है, इससे अच्छी बहस हो सकती थी। जब इस बहस का फैसला आया तो उसमें से 140 लोगों को फांसी से बरी कर दिया गया।