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प्रकृति और मानव के अंतरसंबंधों कोजीने की सामाजिक कला है चौमासा

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बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र और श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर हयूमन एक्सीलेन्स, कलबुर्गी, कर्नाटक की ओर से दो दिवसीय संगोष्ठी में चौमासा पर वक्ताओं ने चर्चा की। आयोजन में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि चौमासा प्रकृति और मानव के अंतरसंबंधों को जीने की सामाजिक कला है। भारत में लोक और शास्त्र एक ही मां के दो पुत्र हैं जो चौमासा के संदर्भ में हमें दोनों से प्राप्त होते हैं।
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श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यूमन एक्सीलेंस, कलबुर्गी, कर्नाटक के संस्थापक मधुसूदन साईं ने कहा कि जिस प्रकार से पानी में चीनी घुलकर मिठास को उत्पन्न करती है उसी प्रकार चौमासा में आध्यात्मिक गतिविधियां हमारे जीवन को आध्यात्मिक बनाती हैं। प्रो. कमलेश दत्त त्रिपाठी और लोकगायिका और केंद्र के शताब्दी पीठ आचार्या प्रो.मालिनी अवस्थी ने भी चौमासा के बारे में बताया। कार्यक्रम में प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय, प्रो. राकेश उपाध्याय, प्रो. फूलचंद जैन, हरिराम द्विवेदी आदि लोग शामिल हुए।
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