दिन भर जबरदस्त गहमागहमी और गतिरोध के बाद आखिरकार बुधवार की रात दस बजे जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी। उनकी नौ सूत्री मांगें मानते हुए बीएचयू प्रशासन ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।
वहीं, जूनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े छात्रों का प्रशासनिक कार्यालय पर धरना जारी है। हड़ताल खत्म होने के साथ बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रामा सेंटर की चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर लौट आई है।
इससे पहले दिन भर मरीज और उनके तीमारदारों को जबरदस्त मुसीबत झेलनी पड़ी। घंटों इंतजार और भागदौड़ के बाद दूरदराज से आए अधिकतर मरीजों को बिना इलाज कराए बैरंग लौटना पड़ा।
हड़ताल खत्म करने के लिए पूर्वाह्न 11 बजे सर सुंदरलाल अस्पताल के डॉक्टर्स लाउंज में जूनियर डॉक्टरों की वार्ता चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमएम उपाध्याय से हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला। मांगें पूरी करने के चिकित्सा अधीक्षक के आश्वासन के बावजूद जूनियर डॉक्टर हड़ताल वापसी के लिए राजी नहीं हुए।
अलबत्ता, पहले की तीन मांगों में एक और मांग जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि 27 मार्च को हुई घटना में किसी जूनियर डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो। ऐसा न होने पर उन्होंने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी भी दी। देर शाम आईएमएस निदेशक डॉ. वीके शुक्ला और चिकित्सा अधीक्षक के साथ जूनियर डॉक्टरों की फिर घंटे भर वार्ता हुई।
इसके बाद रात 10 बजे हड़ताल खत्म करने की जानकारी देते हुए जूनियर डॉक्टरों ने बताया उनकी नौ सूत्री मांगोें को पूरा करने का आश्वासन दिया गया है। जिसमें अस्पताल की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती, अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी, सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाया जाना, अस्पताल में बायोमैट्रिक सिस्टम लगवाए जाने की मांग के साथ यह भी माना गया है कि बीएचयू छात्रों को डॉक्टर तभी देखेंगे जब वे हेल्थ कार्ड लेकर आएंगे और उन्हें हेल्थ सेंटर से रेफर किया गया होगा।
इमरजेंसी ड्यूटी के दौरान छात्र या उनके परिवारीजन को कंसलटेंट देखेंगे और एक मरीज के साथ मात्र दो तीमारदार रहेंगे। हर तीन घंटे पर पुलिस अस्पताल परिसर में पेट्रोलिंग करेेगी और कैंटीन को 24 घंटे खोला जाएगा। जूनियर डॉक्टरों ने वीसी लॉज में कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी से मुलाकात की। उन्होंने भी डॉक्टरों को पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाया।
... लेकिन मांगों पर अड़े छात्र
छात्रों ने भी अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन धरने का फैसला किया है। जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासनिक कार्यालय के सामने धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि जब तक डॉ. मीत मिनारे के निलंबन का लिखित आदेश उन्हें नहीं दिया जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे। धरने की वजह से केंद्रीय कार्यालय का ताला दूसरे दिन भी नहीं खुल सका। वहीं, विज्ञान संस्थान के छात्र के खिलाफ एफआईआर के खिलाफ विज्ञान संस्थान में कुछ कक्षाओं का बहिष्कार किया गया।