वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए जी-20 के फ्रेमवर्क वर्किंग ग्रुप (एफडब्ल्यूजी) की बैठक में विकास की वर्तमान दर को बरकरार रखने पर जोर दिया गया है। दो दिन तक विश्व अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और समावेशी विकास पर दुनिया भर के विशेषज्ञों की चर्चा के दौरान भारत ने विकास से होने वाले लाभ का समान और प्रभावी वितरण किए जाने की पैरवी की।
मजबूत, सतत और संतुलित विकास पर चर्चा के दौरान ढांचागत सुधारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। उभरते बाजार की अर्थव्यवस्था के लिए नीतिगत नियोजन पर भी बातचीत हुई।
वित्त मंत्रालय और आरबीआई की ओर से आयोजित दो दिवसीय मंगलवार को होटल द गेटवे गंगेज में शुरू हुई थी। बैठक के अंतिम दिन बुधवार को जी-20 के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित मामलों और नीतिगत समन्वय पर विचार किया। जी-20 एफडब्ल्यूजी की चौथी बैठक अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में आयोजित की जाएगी।
दो दिन पांच सत्र में चली बैठक के पहले दिन आर्थिक मामलों के विशेष सचिव दिनेश शर्मा और आरबीआई के कार्यकारी निदेशक राजेश्वर राव ने स्वागत भाषण के साथ ही बैठक के एजेंडे के बारे में बताया। कहा कि वैश्विक आर्थिक विकास में सकारात्मक गति रही है। इस गति को आगे भी बनाए रखने की चुनौती है।
विकास के लाभ को प्रभावी और समान रूप से पुनर्वितरित किया गया है। कहा-एजेंडा समावेशी विकास को प्राप्त करने के लिए प्रतिक्रियाओं पर केंद्रित है। राव ने आर्थिक लचीलेपन पर नोट को अंतिम रूप देने के लिए एफडब्ल्यूजी को बधाई दी। कहा कि इसके मार्गदर्शक सिद्धांतों के आधार पर माइक्रो पालिसी तैयार की जा सकती है।
जर्मनी के वित्त मंत्रालय के डॉ. एंड्रियास लक्स और जर्मन बुंदेस बैंक के डॉ. फेलिक्स स्टीफन हौप्ट ने भारतीय वायु सेना के प्रतिनिधियों का स्वागत करने, वाराणसी में उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए भारतीय मेजबानों को धन्यवाद दिया। उन्होंने एफडब्ल्यूजी वाराणसी के एजेंडे से अपेक्षित परिणाम निकलने की भी उम्मीद जताई।
बैठक में कनाडा, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया, इटली, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और स्विटजरलैंड के बैंक के आला अधिकारियों के अलावा संबंधित देशों के वित्त मंत्रालयों के अधिकारी और आर्थिक सलाहकार शामिल रहे।