बैरकों में तलाशी और कैमरा लगाने से नाराज कैदियों ने गुरुवार को गाजीपुर जिला जेल में जमकर उपद्रव किया। दो बंदी रक्षकों और कैमरा लगाने वाले युवक को बंधक बना लिया। तोड़फोड़ पथराव और आगजनी कर रहे कैदियों को काबू में करने के लिए बंदी रक्षकों को कई राउंड हवाई फायरिंग करनी पड़ी। गाजीपुर जिला जेल अपने करमानों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहा है। चार वर्ष पहले जेल के बैरक नंबर तीन में चेकिंग के दौरान मोबाइल मिलने से जेल प्रशासन और बंदी रक्षकों के बीच गुरिल्ला युद्ध हुआ था। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जेल में पहुंच गए। बाद में डीएम और एसपी के समझाने पर करीब चार घंटे बाद कैदी शांत हुए। जेलर एससी त्रिपाठी गुरुवार को दिन में पीएसी के साथ बैरक नंबर पांच और सात की तलाशी लेने गए थे। तब बैरकों में सीसीटीवी कैमरा लगाया जा रहा था। 2.55 बजे जैसे ही तलाशी खत्म हुई व पीएसी के जवान जेल से बाहर निकले। कैदियों और बंदियों ने हंगामा करते हुए बंदीरक्षक श्रीराम व अनिल भाष्कर तथा सीसीटीवी कैमरा लगानेवाले अजय यादव को बंधक बना लिया। बंदी रक्षकों ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की वे उन पर पथराव करने लगे।
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हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने पांच राउंड हवाई फायरिंग की। सूचना मिलते ही एडीएम राजेश सिंह, एसपी सिटी प्रदीप दुबे, एसडीएम सदर, एसडीएम जमानिया विनय गुप्ता, एसपी ग्रामीण चंद्रप्रकाश शुक्ला सहित कई थानों की फोर्स जेल पहुंच गई पर बंदी नारेबाजी करते रहे। शाम 4.40 बजे बंदियों ने अपने बिस्तरों में आग लगा दी जिसे फायर कर्मियों ने किसी तरह बुझाया। पांच बजे डीएम के बाला जी और एसपी यशवीर सिंह और सीडीओ हरिकेश चौरसिया भारी पुलिस फोर्स के साथ जेल में पहुंचे और कैदियों से बात की।
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उनके समझाने पर कैदियों ने तीनों बंधकों को मुक्त कर दिया। जेलर एससी त्रिपाठी ने बताया कि निरंतर चेकिंग से कैदी क्षुब्ध हैं। मोबाइल टेकर लगने से कोई भी व्यक्ति मोबाइल लेकर अंदर नहीं जा सकता।13 अगस्त से बैरकों की चेकिंग और सीसीटीवी कैमरा लगाने का कार्य चल रहा है। इससे उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा था। कैदियों ने सीसीटीवी कैमरा और तलाशी को मुद्दा बनाकर जेल में तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की। कई कैमरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। बंदीरक्षकों और कैमरामैन को बंधक बनानेवालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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जिला जेल में बंदियों के हंगामा की जानकारी होते ही कुछ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। अंदर जाने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने और फोर्स बुलाने का आदेश दिया। फिर क्या था, एक के बाद एक पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के वाहन पहुंचने लगे। कुछ ही देर में जेल छावनी में तब्दील हो गया। मोर्चा संभालने के लिए कतारबद्ध होकर पुलिस अधिकारी और कर्मी जेल के अंदर प्रवेश करने लगे।
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जेल में कैदियों और बंदियों के हंगामा के बीच जेल के बाहर मौजूद पुलिस अधिकारी, कर्मी और अन्य लोग 4.40 बजे उस समय सहम गए, जब जेल के अंदर से धुआं निकलते उन्हें दिखाई दिया। लोग यह कयास लगाने लगे कि शायद बंदियों ने अंदर आग लगा दिया है। लोगों का अंदाजा सही था। बंदियों ने जेल की बिस्तर में आग लगा दिया था। फायर कर्मियों ने आग को बुझाया।
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बवाल के बाद जेल के अंदर पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स होने के बाद भी बंदियों का गुस्सा शांत नहीं था। उनके इस कदर रोष था कि वह लगातार जेल प्रशासन के खिलाफ प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। कैदियों की नारेबाजी सुनकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उनके मन में बंदी रक्षकों का कोई भय नहीं था। उनकी आवाज बाहर तक आ रही थी। इससे बाहर खड़े पुलिस कर्मी भी सहमे रहे और यह कयास लगाते रहे कि लगता है कि आज बंदी बड़ा हंगामा करेंगे।
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बंदियों ने प्रभारी जेलर पर हमला बोलते हुए जमकर पथवार किया था। उन्हें काबू में करने के लिए बंदी रक्षकों द्वारा की गई फायरिंग में गोली लगने से एक बंदी की मौत हो गई थी। जबकि पथराव में छह बंदी रक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 14 फरवरी 2014 की शाम करीब पौने छह बजे प्रभारी जेलर को सूचना मिली थी कि बैरक नंबर-तीन में एक बंदी मोबाइल पर किसी से बात कर रहा है। इस पर वह चेकिंग करने बैरक में पहुंच गए। इस दौरान उन्हें स्विच बोर्ड में एक चार्जर लगा दिखाई दिया, जिसे तोड़ कर उन्होंने फेंक दिया था।
यह बात बैरक में मौजूद बंदियों को नागवार गुजरी थी और वह प्रभारी जेलर से भिड़ गए थे। कहासुनी इस कदर बढ़ी थी कि बंदियों ने प्रभारी पर हमला कर उनका सिर फोड़ दिया था। यह देख बंदी रक्षक अवनींद्र सिंह तथा राजेश उपाध्याय ने प्रभारी जेलर को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन आक्रोशित बंदियों ने उनकी भी पिटाई शुरू कर दी थी। इसी बीच बैरकों में जा रहे सभी बंदी लामबंद हो गए थे। उनके आक्रोश को देख प्रभारी जेलर और बंदी रक्षक बचाओ-बचाओ की आवाज लगाने लगे थे।