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नम आंखों से दी चंद्रमौलि पांडेय को विदाई

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वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी चंद्रमौलि पांडेय और उनकी मां का अंतिम संस्कार सोमवार की शाम को किया गया। मां और बेटे की चिता एक साथ जली तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। चंद्रमौलि पांडेय को उनके छोटे पुत्र हर्ष पांडेय और मां सूर्यकांति को पुत्र शेखर पांडेय ने मुखाग्नि दी। अंतरराष्ट्रीय पहलवान और प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी के हादसे में निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। हादसे की जानकारी के बाद खिलाड़ियों और अधिकारियों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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चंद्रमौलि पांडेय व उनकी मां का शव देर शाम मणिकर्णिका घाट पर पहुंचा। खिलाड़ियों के साथ ही कई जिलों के खेल अधिकारी उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उनके जानने वालों की आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। इसके पूर्व सुबह जब सड़क हादसे में मौत की सूचना लोगों को मिली तो किसी को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ।
सिगरा में रहते थे चंद्रमौलि
चंदौली जिले के मसोई गांव निवासी चंद्रमौलि पांडेय वाराणसी मंडल के प्रभारी क्षेत्राधिकारी थे और पत्नी, बच्चे के साथ सिगरा में रहते थे। चंद्रमौलि पांडेय के भाई शेखर पांडेय, बहन नन्हीं पांडेय, माता सूर्यकांति आदि मसोई गांव में रहते थे। माता सूर्यकांति का इलाज शहाबगंज के चिकित्सक के यहां चल रहा था। रविवार को चंद्रमौलि पांडेय गांव आए थे और देर शाम माता, भाई शेखर और बहन को लेकर स्विफ्ट डिजायर कार से शहाबगंज गए थे। रात साढ़े नौ बजे सभी गाड़ी से वापस लौट रहे थे। अभी वे एकौना गांव के मोड़ पर पहुंचे थे कि फिसलन की वजह से गाड़ी अनियंत्रित होकर नहर में चली गई। चीख पुकार सुनकर आस पास के लोग दौड़े और किसी तरह चारों केे बाहर निकाला। सभी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने चंद्रमौलि पांडेय (55) और सूर्यकांति (80) को मृत घोषित कर दिया। चंद्रशेखर और नन्हीं को हल्की चोटें थीं। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूचना पाकर चकिया क्षेत्राधिकारी कुंअर प्रभात सिंह भी मौके पर पहुंच गए। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।
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मां बेटे की मौत के बाद गांव में पसरा रहा सन्नाटा
शहाबगंज(चंदौली)। वाराणसी मंडल के प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंद्रमौलि पांडेय और उनकी माता सूर्यकांति की मौत की घटना के बाद मसोई गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। हर किसी के जुबां पर उन्हीं की चर्चा थी। संपन्न परिवार केचंद्रमौलि पांडेय अच्छे पहलवान और कोच थे। नौकरी लगने के बाद ही पहले गोरखपुर और फिर वाराणसी में रहने लगे, लेकिन गांव से नाता हमेशा जुड़ा रहा। अत्यंत सरल स्वभाव के चंद्रमौलि हर दिल अजीज थे। चंद्रमौलि पांडेय का छोटा भाई शेखर पांडेय खेती किसानी करता है और बहन नन्हीं पांडेय घर में रहती है। चंद्रमौलि पांडेय का एक मात्र पुत्र हर्ष पांडेय (14) पढ़ाई करता है। चंद्रमौलि की मौत के बाद पत्नी सुधा पांडेय और बेटे हर्ष का रो रोकर हाल बेहाल हो गया। एक साथ मां बेटे की मौत के बाद सोमवार को गांव में चूल्हे नहीं जले।
खिलाड़ियों ने जताया शोक
वाराणसी। अपकमिंग प्लेयर्स सॉकर अकादमी की तरफ से आरएसओ चंद्रमौलि पांडेय को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर सत्येंद्र सिंह, मुश्ताक अली, नीलेश सिंह, धर्मेंद्र सिंह, आनंद सिंह, कैलाश यादव व हिमांशु मिश्र मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश फुटबाल संघ की ओर से मो. शम्सुद्दीन ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सिगरा स्टेडियम में चल रही सब जूनियर बालक वाराणसी मंडल फुटबाल का चयन परीक्षण स्थगित कर दिया गया। सेंचुरी स्पोर्ट्स क्लब की ओर से भी श्रद्धांजलि दी गई। जिला ओलंपिक संघ की ओर शम्स तबरेज शम्पू, एमएन पांडेय, गोपाल सेठ, नफीस, विश्वासराव ने श्रद्धांजलि दी। पद्मश्री प्रशांति सिंह ने भी शोक जताया।
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