ईंट-पत्थर के बाद तीर-धनुष से हमला करने का आरोप
वन विभाग के अनुसार ग्रामीणों ने पहले टीम पर ईंट-पत्थर और मिट्टी फेंकनी शुरू की। स्थिति बिगड़ने पर लाठी-डंडे, गुलेल और तीर-धनुष से भी हमला किया गया। अचानक हुए हमले से मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। सरकारी कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के लिए पीछे हटना पड़ा। वन विभाग ने घटना को सरकारी कार्य में बाधा और सरकारी कर्मचारियों पर हमला बताया।
सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले में 20 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 80 अज्ञात महिला-पुरुषों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज किया गया है। पुलिस अब अज्ञात आरोपियों की पहचान में जुटी है।
सांसद पहुंचे तो महिलाओं ने सुनाया दूसरा पक्ष, कहा- बाहरी से पिटवाया गया
गिरफ्तार ग्रामीणों से मिलने बृहस्पतिवार को पहुंचे सपा सांसद छोटेलाल के सामने महिलाओं ने पुलिस और वन विभाग पर ही मारपीट के गंभीर आरोप लगा दिए। महिलाओं का कहना है कि बाहर से लोगों को बुलाकर लाठी-डंडे से ग्रामीणों को पिटवाया गया और बाद में हमला करने का आरोप उन्हीं पर लगा दिया गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों से भरदुआ का वन भूमि विवाद अब और गरमा गया है।
सांसद ने पहले सीओ देवेंद्र कुमार, एसडीएम मुकेश चंद्र वर्मा और रेंजर अमित श्रीवास्तव से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाए गए गिरफ्तार ग्रामीणों से भी मुलाकात की। सांसद के सामने महिलाओं ने पुलिस और वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। महिलाएं रोते हुए अपनी शिकायतें बताने लगीं। उनका कहना था कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोग बिना वर्दी के लाठी-डंडे लेकर पहुंचे थे।
आरोप है कि बाहर से लोगों को बुलाकर ग्रामीणों के साथ मारपीट कराई गई। महिलाओं ने दावा किया कि बाद में पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार ग्रामीणों को बताते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।
कहा- कई साल से कर रहे खेती, इस बार मिर्च की फसल थी
महिलाओं ने बताया कि जिस भूमि को लेकर विवाद हुआ, उस पर वे कई वर्षों से खेती करती आ रही हैं। इस बार उन्होंने वहां मिर्च की फसल लगाई थी। फसल अब तैयार होने लगी थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान फसल नष्ट हो गई। ग्रामीण महिलाओं का कहना था कि खेती से ही उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। फसल बर्बाद होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ कर्मचारी बिना वर्दी के लाठी-डंडे लेकर आए थे और ग्रामीणों के साथ मारपीट की। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके।
सांसद बोले- कानून हाथ में न लें, कागजात के साथ करें कार्रवाई
सपा सांसद छोटेलाल ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों से उन्होंने गिरफ्तार लोगों की जमानत कराने और संबंधित कागजात के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही। सांसद ने अधिकारियों से भी घटना की जानकारी ली और ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों को उनके सामने रखा।
दोनों पक्षों के दावों से बढ़ी जांच की चुनौती
भरदुआ की घटना में अब दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने से मामला पेचीदा हो गया है। वन विभाग का कहना है कि वन भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही थी और कब्जा हटाने पहुंची सरकारी टीम पर ग्रामीणों ने हमला किया। वहीं ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और बाद में उन्हें ही आरोपी बना दिया गया।
वन भूमि पर अवैध कब्जा कर धान की रोपाई की जा रही थी। कब्जा हटाने पहुंची संयुक्त टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया और सरकारी कर्मचारियों पर हमला किया। मामले में 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। - देवेंद्र कुमार, सीओ, नौगढ़