पुलिस के अनुसार, लोन स्वीकृत कराने के नाम पर पहले पीड़ितों से प्रोसेसिंग फीस जमा कराई जाती थी। इसके बाद सिक्योरिटी मनी, बीमा शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर अलग-अलग रकम की मांग की जाती थी। इस तरह अलग-अलग मदों में रकम जमा कराने के बाद आरोपियों की ओर से लोगों से संपर्क बंद कर दिया जाता था। साइबर फ्रॉड से हासिल रकम भी गिरोह से जुड़े बैंक खातों में मंगाई जाती थी।
शिकायतों के विश्लेषण और तकनीकी जांच के दौरान पुलिस ने समन्वय पोर्टल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन किया। जांच में गिरोह द्वारा संचालित बैंक खातों और उसकी गतिविधियों से संबंधित विभिन्न राज्यों की 16 साइबर शिकायतें दर्ज मिलीं। इसके अलावा गौतमबुद्धनगर (नोएडा) में भी धोखाधड़ी का एक मुकदमा दर्ज होने की जानकारी पुलिस को मिली।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह से जुड़े बैंक खातों में करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की रकम होल्ड मिली है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है। साथ ही बैंक खातों में हुए वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।