मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय में शुरू हुई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया। अभियोजन ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राजेंद्र पांडेय, टोनू पांडेय, उषा पांडेय, रीना पांडेय और शोभा पांडेय को हत्या के मामले में दोषी पाया।
बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-4 दिनेश कुमार की अदालत ने पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। वर्ष 2017 में दर्ज हुए इस मामले में करीब नौ वर्ष बाद अदालत का फैसला आया। सजा सुनाए जाने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।