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यूपी: हत्या के मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास, नौ साल चला मुकदमा; 12 लोगों ने दी गवाही

Wed, 16 Sep 2026 07:49 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।

सार

मेंहनगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में हुई हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-4 दिनेश कुमार की अदालत ने पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सभी पर 1.05-1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। मामले की सुनवाई करीब नौ साल चली। अभियोजन की ओर से 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे।
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हत्या के मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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आजमगढ़ के मेंहनगर थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में हुई हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-4 दिनेश कुमार की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर 1.05-1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया।

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अभियोजन के अनुसार, तीन फरवरी 2017 को पटना अहियाई गांव निवासी प्रभात कुमार दूबे ने मेंहनगर थाने में तहरीर दी थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि भीखमपुर गांव निवासी राजेंद्र पांडेय, टोनू पांडेय, उषा पांडेय, रीना पांडेय और मेंहनगर कस्बा निवासी शोभा पांडेय ने उनके पिता वीरेंद्र दूबे की गला दबाकर हत्या कर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की थी।

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मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायालय में शुरू हुई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया गया। अभियोजन ने गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास किया।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने राजेंद्र पांडेय, टोनू पांडेय, उषा पांडेय, रीना पांडेय और शोभा पांडेय को हत्या के मामले में दोषी पाया।

बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-4 दिनेश कुमार की अदालत ने पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.05 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। वर्ष 2017 में दर्ज हुए इस मामले में करीब नौ वर्ष बाद अदालत का फैसला आया। सजा सुनाए जाने के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।
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