नवरात्रि के पहले दिन दुर्गाकुंड मंदिर में उमड़ी भीड़
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- 03 अप्रैल - द्वितीय तिथि - सर्वार्थ सिद्धि योग
- 04 अप्रैल - तृतीय तिथि - रवियोग
- 05 अप्रैल - चतुर्थी तिथि - सवार्थ सिद्ध व रवियोग
- 06 अप्रैल - पंचमी तिथि - रवियोग व सवार्थ सिद्धि योग
- 07 अप्रैल - षष्ठी तिथि - रवियोग
- 08 अप्रैल - सप्तमी तिथि - सवार्थ सिद्धि योग
- 09 अप्रैल - अष्टमी तिथि - रवियोग
- 10 अप्रैल - राम नवमी - रवियोग व रविपुष्य योग
कन्या पूजन का महत्व
कुमारी पूजन नवरात्रि व्रत का अनिवार्य अंग है। कुमारिकाएं जगत जननी जगदंबा का प्रत्यक्ष विग्रह हैं। सामर्थ्य हो तो नौ दिन तक, अन्यथा सात, पांच, तीन या एक कन्या को देवी मानकर पूजा करके भोजन कराना चाहिए।
आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि दुर्गासप्तशती के एक पाठ से फलसिद्धि, तीन पाठ से उपद्रव शांति, पांच पाठ से सर्वशांति, सात पाठ से भय मुक्ति, नौ पाठ से यज्ञ केसमान फल, 11 पाठ से राज्य की प्राप्ति, 12 पाठ से कार्यसिद्धि, 14 पाठ से वशीकरण, 15 पाठ से सुख-संपत्ति, 16 पाठ से धन व पुत्र की प्राप्ति, 17 पाठ से राजभय व शत्रु रोग से मुक्ति, 20 पाठ से ग्रहदोष शांति और 25 पाठ से बंधन मुक्ति।