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बलिया में बनी पीपीई किट की गुणवत्ता पर लगी केंद्र सरकार की मुहर

Tue, 16 Jun 2020 06:23 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, बलिया

सार

  • ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की प्रयोगशाला में हुई टेस्टिंग
  • मेल के जरिए मिला यूसीसी
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PPE KIT - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बलिया जिले में बनी पीपीई किट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। अब यहां बनी किट अन्य जिलों या राज्यों को भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। कोरोना के नोडल अधिकारी व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विपिन जैन ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से कानपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की लेबोरेटरी में इस पीपीई किट की टेस्टिंग हुई। वहां से मंगलवार को मेल के जरिए यह जानकारी दी गई कि बलिया में बनी किट की गुणवत्ता बेहतर है।

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उन्होंने बताया कि मेडिकल टीम की ओर से मंजूर पीपीई किट का उपयोग स्वास्थ्य कर्मियों ने किया और जांच में वे स्वस्थ मिले। बाद में कपड़ा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नई गाइडलाइन जारी हुई। इसके बाद इस किट को केंद्र सरकार की कानपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के लेबोरेटरी में भेजा गया। बेसिक जांच में इसकी गुणवत्ता सही मिलने पर वहां के एडिशनल जनरल मैनेजर ने खुशी जाहिर की। वहां से यूनिक सर्टिफिकेट कोड (यूसीसी) दिया गया।

उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण शुरू होने पर जब देश में पीपीई किट की कमी थी तो संयुक्त मजिस्ट्रेट विपिन जैन के मन में स्थानीय स्तर पर पीपीई किट बनवाने का ख्याल आया था। उन्होंने उद्योग केंद्र के माध्यम से खालसा बैग हाउस से संपर्क किया। इसके बाद खालसा बैग हाउस फर्म तैयार हो गया। फिर कपड़ा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन की जानकारी लेने के बाद किट बनाने का प्रयास शुरू हुआ।

सीएमओ, उपायुक्त उद्योग के साथ मिलकर सुरक्षा संबंधी चर्चा की गई। खालसा बैग हाउस के सुरेंद्र सिंह छाबड़ा ने रॉ मैटेरियल की व्यवस्था की। इसमें प्रयोग होने वाला एंटी बैक्टीरियल किट बंगलूरू से मंगाया गया है। छाबड़ा ने नोएडा आदि जगहों पर जाकर किट की कमियों का अध्ययन किया। इसके बाद पीपीई किट तैयार हुआ।

आधे खर्च में कोरोना योद्धाओं को मिला सुरक्षा कवच
स्थानीय स्तर पर पीपीई उपलब्ध होने से एक बड़ा फायदा यह हुआ कि नो प्रॉफिट-नो लॉस के आधार पर अन्य जिले के मुकाबले आधे खर्च में कोरोना योद्धाओं के लिए सुरक्षा कवच मिल गया। पीपीई किट पर अन्य जिलों के अपेक्षा यहां कम खर्च हुआ। जो किट अन्य जिलों में 1200 की पड़ रही है, यहां 600 में उपलब्ध हो जा रही है। इस तरह आधे खर्च में कोरोना योद्धाओं के लिए सुरक्षा कवच उपलब्ध हो सका।

उद्यम समागम की सोच हो रही पूरी
वर्ष 2019 में जिले में समागम हुआ था और उसमें उद्यमियों को आमंत्रित किया गया था। अपेक्षा थी कि बलिया में भी काम कर औद्योगिक इकाइयां स्थापित करें और कुछ नया स्टार्टअप हो। कोरोना काल में यह सोच पूरी होती दिख रही है। स्थानीय स्तर पर बनी पीपीई किट के रूप में यह स्टार्टअप मिला। इसकी गुणवत्ता पर भारत सरकार की ओर से मंजूरी मिलने के बाद इसे एक बढ़िया स्टार्टअप माना जा रहा है।
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जरूरत पड़ी तो दूसरे जिले को भी देने की क्षमता
संयुक्त मजिस्ट्रेट विपिन जैन ने कहा कि स्थानीय स्तर पर इस किट को बनाने का फायदा यह भी हुआ कि आज हमें स्टॉक की कोई चिंता नहीं है। जरूरत पड़ने पर कभी भी सौ-दो सौ पीपीई किट बनाया जा सकता है। इतना ही नहीं, अगर अन्य जिलों को बहुत जरूरत पड़ गई तो उन्हें हम उपलब्ध भी करा सकते हैं। हफ्ते भर का समय मिला तो हजार-डेढ़ हजार किट देने की क्षमता है। मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों को छोड़ दिया जाए तो प्रदेश का पहला जनपद है जहां स्थानीय स्तर पर बेहतर गुणवत्ता का पीपीई किट का निर्माण हुआ है।

दस कुशल श्रमिकों को मिला रोजगार
उपायुक्त उद्योग राजीव कुमार पाठक ने बताया कि बाहर से हर प्रवासियों की स्किल मैपिंग की गई। उनको उनकी कुशलता के आधार पर रोजगारपरक बनाने का प्रयास है। हर प्रवासी से फोन के जरिए बात की गई। वह किस कार्य में कुशल हैं, इसके पहले बाहर में क्या काम करते थे, इसकी विस्तृत जानकारी ली गई। बताया कि पूर्वांचल के सभी श्रमिकों को इंडिया लेवल पर सेवायोजित करने की योजना है। इसी के तहत औद्योगिक आस्थान माधोपुर में दस श्रमिकों को सेवायोजित किया जा चुका है।
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