समीक्षा बैठक में केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अल्फोंस और प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी
- फोटो : अमर उजाला
धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी को केंद्र और प्रदेश सरकार पर्यटन हब बनाने जा रही है। यहां की ऐतिहासिक विरासतों को सहेजने के साथ ही उन्हें पर्यटन के लिहाज से विकसित किया जाएगा।
केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अल्फोंस और प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने सोमवार को सर्किट हाउस में हुई समीक्षा बैठक में काशी को पर्यटन हब बनाने की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
गंगा नदी में पहले से प्रस्तावित क्रूज संचालन की योजना को हर हाल में फरवरी 2019 तक शुरू कराने की बात कही। केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस और प्रदेश सरकार की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने यहां प्रदेश भर में चल रहीं पर्यटन विभाग की परियोजनाओं की समीक्षा की।
विभागीय उच्चाधिकारियों को निर्देश दिया कि वाराणसी के धर्म, संस्कृति को पर्यटन से जोड़ा जाए। इसे प्रदेश के पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि वाराणसी का हर कोना आश्चर्यों से भरा है। इन्हें विश्व पर्यटन मानचित्र पर उभारा जाए। प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने प्रसाद एवं स्वदेश योजना के कार्यों को तत्परता से पूरा कराने की ताकीद की।
दोनों मंत्रियों ने सारनाथ का किया दौरा
केजे अल्फोंस और रीता बहुगुणा जोशी
- फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि प्रसाद योजना के वाराणसी में संचालित सभी कार्य पूरे हो गए हैं। सारनाथ में लाइट एंड साउंड का कार्य 15 अक्तूबर तक हो जाएगा। मथुरा में संचालित कार्यों को दिसंबर 2018 तक पूरा करा लिया जाएगा।
स्वदेश योजना में रामायण और बुद्धिस्ट सर्किट का काम कराया जा रहा है। रामायण सर्किट में अयोध्या में 133 करोड़ तथा चित्रकूट व शृंगवेरपुर में 69 करोड़ की लागत से कार्य कराए जा रहे हैं।
बुद्धिस्ट सर्किट में श्रावस्ती, कपिलवस्तु और कुशीनगर में 100 करोड़ की लागत से पर्यटन विकास के कार्य कराए जा रहे हैं। केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री केजे अल्फोंस ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए 180 करोड़ की लागत से 94 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें 76 परियोजनाओं का काम शुरू करा दिया गया है।
बैठक के बाद प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी के साथ दोनों मंत्रियों ने सारनाथ का दौरा किया। वहां सीता रसोइया, म्यूजियम एवं बौद्ध स्तूप का निरीक्षण किया। मूलगंध कुटी को दुरुस्त करने का निर्देश दिया। फिर दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती देखी और मान मंदिर का अवलोकन किया।