कासिमाबाद। बीते दिनों थाना क्षेत्र के एक गांव में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चालान कर दिया था। इसमें दोषी पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह ने थानाध्यक्ष, दारोगा और कांस्टेबल को निलंबित कर दिया। एसपी के निर्देश पर सोमवार की रात क्षेत्राधिकारी कासिमाबाद ने निलंबित थानाध्यक्ष समेत तीनों पुलिस कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज कराया है। इस कार्रवाई से जनपद के पुलिस कर्मियों में खलबली मची हुई है।
कासिमाबाद क्षेत्र के एक गांव में एक सप्ताह पूर्व अपने मौसी के घर रह रही 13 वर्षीय एक किशोरी के साथ उसी गांव के एक युवक ने दुष्कर्म कर दिया था। पीड़िता के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज करते हुए आरोपी युवक का चालान कर दिया था, जिसे उपजिलाधिकारी ने जेल भेज दिया था। इधर किशोरी को मेडिकल परीक्षण के लिए सीएचसी से जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। परीक्षण में दुष्कर्म का मामला सिद्ध हो जाने के बाद मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दुष्कर्म का मामला पंजीकृत करते हुए पहले से जेल गए युवक को संबंधित धारा से जोड़ दिया था। एसपी रविवार की सुबह घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़िता का बयान लिए थे। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया स्थानीय पुलिस की लापरवाही पाया था। सोमवार को एसपी ने प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार पांडेय, उप निरीक्षक जयप्रकाश यादव के साथ कांस्टेबल मुंशी विकास सिंह को निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद लोग समझ रहे थे कि अब इससे अधिक कार्रवाई संबंधित पुलिस कर्मियों पर नहीं होगी, लेकिन सोमवार की देर रात क्षेत्राधिकारी महमूद अली ने प्रभारी निरीक्षक, उप निरीक्षक और कांस्टेबल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराया। क्षेत्राधिकारी ने बताया कि 13 वर्षीय नाबालिग पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न की घटना की जानकारी के बावजूद तत्समय थाने पर मौजूद हल्का उपनिरीक्षक जयप्रकाश यादव अपराध का अल्पीकरण करने में लगे रहे। इसी प्रकार प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार पांडेय द्वारा इस प्रकरण पर गंभीरतापूर्वक संज्ञान न लेने के साथ ही कांस्टेबल मुंशी विकास सिंह द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भेजी गई चिट्ठी पर सिर्फ बदन दर्द लिखकर भेजने पर तीनों लोगों पर अभियोग पंजीकृत कराया गया।