उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में अदालत में मामूली लिपिकीय गलती से कुर्की के मामले में कोर्ट फीस जमा करने के बाद भी एक महिला को 41 वर्ष तक अदालत के चक्कर लगाने पड़े।
मामले में 31 अगस्त को सीनियर डिविजन जज लवली जायसवाल ने गलती पकड़ी और त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले का निस्तारण किया।
शहर कोतवाली क्षेत्र निवासी गंगा देवी के परिवार के मुताबिक उनके मकान को वर्ष1975 में किसी कारणवश डीएम के निर्देश पर सदर तहसीलदार ने कुर्क कर दिया था।
प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ गंगा देवी ने सिविल जज (सीनियर डिविजन) की अदालत में याचिका दाखिल की थी। इस पर कोर्ट ने 1977 में वादिनी को 312 रुपये कोर्ट फीस जमा करने का आदेश दिया था।
इसके बाद गंगा देवी ने फीस जमा कर दी थी। फिर अदालत ने गंगा देवी के पक्ष में इस मुकदमे का निस्तारण भी कर दिया। अदालत के इस फैसले के विरोध में राज्य सरकार ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।