ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में शिवलिंग मिलने का दावा किया जा रहा है।
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जिला जज की अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को अपने आदेश में कहा था कि सर्वे में मिले शिवलिंग को सुरक्षित व संरक्षित रखा जाए। ऐसी स्थिति में यदि कार्बन डेटिंग तकनीक का प्रयोग करने पर या जीपीआर पद्धति का प्रयोग करने पर उक्त शिवलिंग को क्षति पहुंचती है तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद।
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जिला जज की अदालत ने कहा था कि मेरे विचार में इस स्तर पर अधिवक्ता कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान मिले कथित शिवलिंग की आयु, प्रकृति और संरचना का निर्धारण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वे को निर्देश दिया जाना उचित नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि उपरोक्त विवेचन के प्रकाश में अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि वादिनी संख्या दो से पांच तक के अधिवक्ता हरिशंकर जैन व विष्णु जैन का प्रार्थनापत्र निरस्त होने योग्य है। ऐसे में कार्बन डेटिंग का आवेदन खारिज किया जाता है। इसके अलावा ऐसा होने पर आम जनता की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंच सकती है।