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संकट मोचन संगीत समारोह: थाल की दो सिरों पर खड़े हो किया कथक, कैंसर से लड़ीं; 30 कीमोथेरेपी ले चुकी हैं नयनिका

Mon, 21 Apr 2025 05:19 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Sankat Mochan Music Festival: संकट मोचन हनुमत दरबार में संगीत समारोह की पांचवीं निशा पर कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली की नयनिका घोष ने एक साथ तीन घरानों बनारस, लखनऊ और जयपुर के स्टाइल में कथक किया। 
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दिल्ली की नयनिका घोष ने किया कथक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की नयनिका घोष ने बनारस, लखनऊ और जयपुर तीनों घरानों के कथक नृत्य से श्रोताओं को संशय में डाल दिया। थाल की दोनों सिरों पर पैर रखकर करीब पांच मिनट तक उन्होंने नृत्य किया तो ऐसा लगा ही नहीं कि वह एडवांस स्टेज के कैंसर से पीड़ित थीं। 30 कीमोथेरेपी ले चुकीं कथक नृत्यांगना की ऊर्जा देख दर्शक अवाक रह गए। तबले की थिरकिट पर थाल के साथ वह दो फीट आगे-पीछे खिसककर नृत्य करती रहीं।

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10 मिनट तक तबले और नृत्यांगना के घुंघरुओं के बीच सवाल-जवाब का भी दौर चला। कथक कलाकार ने ता थइया और तबला वादक ने ना-धिन-धिन-ना की भाषा में एक-दूसरे के सवालों के जवाब दिए तो श्रोता उसे डिकोड करने में लग गए। नयनिका घोष ने कथक से मां गंगा के विहंगम स्वरूप को बताते हुए भगवान राम की वंदना की। मानस और सुंदरकांड में सीता-हनुमान के प्रसंग को नृत्य में करके दिखाया।

गुरु पं. विजयशंकर और पद्मविभूषण पं. बिरजू महाराज के सानिध्य में नृत्य की शिक्षा ले चुकीं नयनिका घोष ने तीन ताल में उठान, आमद, परन, रेला, चक्करदार परन, फरमाइशी परन, घुंघरुओं का चलन किया। पं. बिंदादीन महाराज की ठुमरी मुझे छेड़ो न नंद के सुनहु छैल... पर बड़े भाव-भंगिमा के साथ नृत्य की प्रस्तुति दी। तबले पर उस्ताद अकरम खां, पखावज पर महावीर गंगानी, सितार पर रईस खां ने संगत की। बोलपढ़ंत मयूख भट्टाचार्य और गायन समीउल्ला खां ने किया।

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30 बार कीमोथेरेपी कराई। 2019 में एडवांस स्टेज के कैंसर पता चला। डॉक्टरों ने कह दिया था कि इस बीमारी में कोई बचता ही नहीं है। लेकिन, वह कैंसर फाइटर के तौर पर अपनी पहचान बनाने में सफल हो गईं। उनका कहना है कि कैंसर से सुरक्षित रखने में इलाज के बाद दूसरा बड़ा सहारा योग-प्राणायाम और तीसरा कथक ही रहा है। वह 5 साल की उम्र से ही कथक सीख रही हैं।
 
चलो रे मन गंगा-जमुना तीर
संकटमोचन संगीत समारोह पांचवीं निशा में अचानक से एक प्रस्त़ुति जोड़ी गई। प्रयागराज के ऋषि मिश्रा ने ख्याल और राग शुद्ध कल्याण में गायन किया। ‘शिव शंकरा’ बंदिश सुनाने के बाद ‘मन में विराजे राम’और एक ताल में ‘जय प्यारे हनुमान’ की बंदिशें पेश कीं। फिर ‘चलो रे मन गंगा जमुना तीर’ भजन से गायन का समापन किया।
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