महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान सुंदरपुर में भर्ती बिहार निवासी मरीज ने सोमवार आधी रात बाद चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी। पहली बार कैंसर संस्थान में हुई घटना से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों और अस्पताल प्रशासन से बातचीत कर जानकारी ली। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मरीज का 15 दिन पहले ही पैंक्रियाज का ऑपरेशन हुआ था। जिस समय घटना हुई, उस समय वार्ड के गेट पर डयूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी को इसकी भनक नहीं लग सकी। परिजनों के मुताबिक, सुरक्षाकर्मी सो रहा था।
बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी रामेश्वर कुमार (35) को पैंक्रियाज कैंसर था। परिजनों ने पहले मुजफ्फरपुर में 15 जुलाई को टाटा कैंसर संस्थान में दिखाया। यहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी और सुंदरपुर महामना कैंसर संस्थान में रेफर कर दिया। परिजनों ने 16 जुलाई को भर्ती कराया। डॉक्टरों ने 21 जुलाई को पैंक्रियाज की सर्जरी की।
रामेश्वर के भाई कमलेश के अनुसार, ऑपरेशन के बाद भैया को चौथी मंजिल पर जनरल वार्ड के बेड नंबर 33 पर भर्ती किया गया। वार्ड में उनके साथ उनकी पत्नी भी थी। सोमवार रात भाई को दवा दिया उसके बाद वह सो गए। इसके बाद कमलेश नीचे आ गया। बताया कि नीचे से जाने पर वार्ड में देखा तो भैया अपने बेड पर नहीं थे। आसपास भी देखा तो नजर नहीं आए। इसके बाद शोर मचाना शुरू किया तब पता चला कि एक मरीज छत से नीचे कूद गया है। बाद में नीचे जाने पर पता चला कि वह भैया थे। कमलेश के अनुसार सुरक्षा कर्मी वार्ड में मौजूद था, लेकिन वह सोया हुआ था। अगर जगे रहते तो वार्ड से किसी के बाहर आने पर तुरंत रोकते।
रामेश्वर के इस कदम से परिजन भी हैरान, कारण का पता नहीं
घटना से परिजन भी हैरान हैं। उन्हें भी कारणों का पता नहीं चल पा रहा है। छोटे भाई कमलेश ने बताया कि रामेश्वर के दो बेटे और एक बेटी है। बीमारी को लेकर भैया चिंतित थे लेकिन ऑपरेशन होने के बाद सामान्य हो गए थे। कमलेश ने बताया कि भैया को नींद आने के बाद नीचे आकर बैठ गया था। कहीं घर में भी किसी को उन्होंने कुछ नहीं बताया।
अस्पताल में किसी ने पूछा नहीं, बस मांगते रहे आधार कार्ड नंबर
शिवपुर पोस्टमार्टम हाउस पर कमलेश ने बताया कि घटना की जानकारी होने के बाद भी अस्पताल प्रशासन से किसी ने कुछ नहीं पूछा। यह भी नहीं बताया कि आखिर वार्ड के बेड से उठकर खिड़की तक जाकर कूदते समय वहां सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं था। घटना के बाद बस लोग हमसे मेरा नाम, घर का पता और आधार कार्ड नंबर ही मांगते रहे। गेट से लेकर अंदर वार्ड तक इतने सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं, वार्ड में मुस्तैदी से डयूटी करने की जगह सुरक्षाकर्मी सो रहा था।
अस्पताल प्रशासन नहीं बता सका मरीज का नाम, इलाज की जानकारी
महामना कैंसर संस्थान में मरीज का नाम, इलाज का विवरण अस्पताल प्रशासन नहीं दे सका। पहले तो बहुत देर तक घटना के बारे में ही जानकारी देने से अस्पताल प्रशासन बचता रहा। मंगलवार सुबह 11 बजे एक बयान जारी किया गया। बताया गया कि सोमवार देर रात 35 साल के पुरुष मरीज की आत्महत्या की घटना सामने आई है। मरीज की पैनक्रियाटिक कैंसर की सर्जरी हुई थी। उपचार के बाद उसकी स्वास्थ्य स्थिति संतोषजनक थी। अस्पताल प्रशासन ने घटना को दुखद बताते हुए शोक भी जताया है। चौकाने वाली बात यह है कि जब मरीज 15 दिन से भर्ती था। छत से कूदकर जान दे दी, फिर भी अस्पताल प्रशासन को मरीज का नाम, पता नहीं पता है।