दो तरह के होते हैं कैंसर के जीन
डॉ. अली ने कहा कि कैंसर के जीन दो तरह के होते हैं, प्रोटो ओंको जीन और ट्यूमर सप्रेशर जीन। इसमें से एक शांत और दूसरे को एक्टिव रहना चाहिए। ट्यूमर सप्रेशर जीन कैंसर को दबाता है और प्रोटो ओंको जीन कैंसर को बढ़ाता है। हर एक में 100 प्रोटो ओंको जीन हैं, जो कि हजारों साल से शरीर में हैं। इसे शांत रहना चाहिए। यदि ये एक्टिवेट होकर प्रोटो से ओंको में बदल गए तो कैंसर हो जाएगा। इस जांच में इन दोनों ही जीन को सीक्वेंस करके देखते हैं कि कहीं इसमें गड़बड़ी छिपी तो नहीं है।
जीन को रिकवर करने वाला ही डैमेज
किसी ने स्मोकिंग की और जीन डैमेज हो गया, लेकिन जब जीन को रिकवर करने वाली मशीनरी ही खराब है तो वहां कैंसर विकसित हो जाता है। हमें इसी डैमेज जीन की पहचान करनी है। फिर, इसे तेजी से बढ़ने से रोकना है या स्पीड को स्लो करना है।