केस-1
देवरिया निवासी रविशंकर महामना कैंसर संस्थान में 15 दिन से भर्ती हैं। इनको फेफड़े में कैंसर की पुष्टि हुई है। इलाज चल रहा है। परिजनों का कहना है डॉक्टर ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली दवा सिसप्लेटिन लिखी थी। कई दुकानों के चक्कर लगाने के बाद लंका में एक दुकान पर किसी तरह मिली। लेकिन, वहां भी दुकानदार ने इसके शॉर्टेज की बात कही।
केस-2
जौनपुर निवासी 54 वर्षीय महिला को कैंसर की पुष्टि 20 दिन पहले हुई। पहले उन्होंने बीएचयू में डॉक्टर को दिखाया। इसके बाद कैंसर संस्थान चली आईं। यहां उपचार करवा रही हैं। महिला के अनुसार परिवार के सदस्य कार्बोप्लेटिन लेने बाजार गए तो वहां बहुत कम स्टॉक की जानकारी मिली। किसी तरह कीमोथेरेपी के लिए दवाई मिल सकी।
कैंसर के मरीजों को नियमित रूप से दवाओं की आवश्यकता होती है। इस वजह से दवाओं का स्टॉक का बने रहना जरूरी है। इसकी कमी उनके इलाज में देरी का कारण बन रही है। सिसप्लेटिन और कार्बोप्लेटिन कैंसर मरीजों के उपचार में प्रयोग होने वाली प्रमुख दवाएं हैं। -प्रो. सुनील चौधरी, रेडियोथेरेपी विभाग, बीएचयू
बाजार में सिसप्लेटिन, कार्बोप्लेटिन आधारित दवाओं की कमी की समस्या बनी है। दवा निर्माता कंपनियों का कहना है कि रॉ मैटेरियल नहीं मिल पा रहा है क्योंकि रॉ मैटेरियल महंगे हो गए हैं। सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग राष्ट्रीय स्तर पर दवा विक्रेताओं ने की है। -संजय कुमार सिंह, महामंत्री, दवा विक्रेता समिति