नालों की समुचित सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था ठीक न होने का दंश शहरवासियों को हर बारिश के दौरान झेलना पड़ रहा है। रविवार की रात और सोमवार सुबह की झमाझम बारिश से शहर की अधिकांश सड़कों और मुहल्लों में पानी जमा हो गया। निचले इलाकों के घरों में पानी घुस गया। घरों से पानी निकलने के बाद मलबा साफ करने में लोग घंटों परेशान रहे। कई कॉलोनियों में रसोई तक पानी पहुंच गया। यह स्थिति तब है, जब जल निगम की ओर से जलनिकासी के लिए 253 करोड़ रुपये खर्च कर ड्रेनेज वाटर पाइप बिछवाई गई है और नगर निगम ने नाले-नालियों की सफाई के लिए 30 लाख रुपये खर्च किए हैं।
बारिश के बाद सोमवार सुबह सड़कों और गलियों में उफनाते सीवर तथा कीचड़ से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। जलविहार कॉलोनी में लोग दूसरे तल पर शरण लिए हुए हैं। नाले-नालियां जाम हैं, इससे जलनिकासी नहीं हो पा रही है। नाले-नालियों की सफाई के लिए जून में नगर निगम प्रशासन अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था, इसके बाद भी स्थिति पहले जैसी है। शहर के तुलसीपुर, रानीपुर, महमूरगंज, बजरडीहा, बड़ी बाजार में घरों तक पानी घुस गया। उधर ईश्वरगंगी के समीप नरहरपुरा में खराब सड़क और गंदगी से लोग परेशान हैं। यहां के अमित श्रीवास्तव ने बताया कि नगर निगम से शिकायत का असर नहीं है। साकेतनगर, संकटमोचन, लंका में जलभराव से काफी फजीहत हुई।
जोनल अधिकारी अतुल यादव ने निगम के इंजीनियरिंग विभाग के अभियंताओं के साथ इन इलाकों का भ्रमण किया। उनका कहना है कि साकेतनगर और संकटमोचन इलाके में बीएचयू परिसर का बरसाती पानी आ रहा है। निगम के चीफ इंजीनियर कैलाश सिंह से आग्रह किया है कि वे बीएचयू प्रशासन से वार्ता कर समस्या का समाधान कराएं।