जैतपुरा थानाध्यक्ष ने बताया कि सीसी कैमरों की फुटेज की मदद से सामने आया कि गत सात जनवरी की शाम चार बजे बड़ी बाजार से अमन ने अपने नाम से एक नया सिम खरीदा। फिर, अपनी दुकान गया और वहां से घर गया। उसके एक दोस्त ने उसे दोपहिया वाहन से औसानगंज चौराहे पर छोड़ा। ऑटो से वह मैदागिन और वहां से कैंट स्टेशन गया। कैंट स्टेशन से ऑटो से पीडीडीयू नगर जंक्शन गया। वहां से पूर्वा एक्सप्रेस से वह गाजियाबाद तक गया। रात में अमन अपने पिता को दो बार व्हाट्स एप कॉल कर अपने अपहरण की कहानी बता कर 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी।
आठ जनवरी को अमन गाजियाबाद में ट्रेन से उतरा तो फिर दो बार अपने पिता को फोन कर फिरौती मांगी। इसके बाद गुड़गांव में रहने वाले अपने मोहल्ले के ही एक दोस्त को फोन किया और उसके फ्लैट के लिए निकला। इस बीच पुलिस को फिरौती मांगने वाले की लोकेशन मिल चुकी थी। पुलिस के संपर्क करने पर अमन के दोस्त ने भी बताया कि वह उसी के पास आ रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम गुड़गांव रवाना हुई और अमन को ले आई।
अपहरण और फिरौती की फर्जी कहानी गढ़ने से पहले अमन ने अपने परिजनों को एक अन्य तरीके से झांसा देने का प्रयास किया था। लापता होने से तीन दिन पहले उसने परिजनों को बताया था कि उसके एक दोस्त के पिता की किडनी खराब हो गई है। इलाज में लगभग 30 लाख रुपये खर्च आएगा। इसलिए सभी दोस्त आर्थिक सहयोग कर रहे हैं। वह भी अपने दोस्त की मदद करना चाहता है। मगर, अमन के परिजनों ने उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उसने अपहरण और फिरौती की फर्जी कहानी रच डाली।