वाराणसी। भारत-नेपाल के रिश्ते को मधुर बनाने के लिए मार्च 2015 में शुरू हुई रोडवेज की मैत्री बस सेवा पिछले 8 महीने से भी अधिक समय से बंद है। वॉल्वो बस सेवा का परमिट और कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद वाराणसी रोडवेज की ओर से बस सेवा बंद कर दी गई थी। एकतरफा काठमांडू से ही वॉल्वो बस का संचालन जारी था। इधर कोरोना के चलते वह भी 24 मार्च से बंद है। विदेश से आने वालों पर रोक चलते यह बस भी वाराणसी नहीं आ रही है। हालांकि जब पर्यटकों के आने पर पाबंदी हटेगी तो वाराणसी रोडवेज से काठमांडू तक जनरथ एसी बस चलाने की तैयारी है। वाराणसी परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक एसके राय ने इस संबंध में एक प्रस्ताव भी बनाया है जिसे जल्द ही मुख्यालय भेजेंगे।
रोडवेज को होती थी अच्छी आय
वाराणसी-काठमांडू के बीच संचालित वॉल्वो बस से रोडवेज को काफी अच्छी आय होती थी। वाराणसी से चार स्टॉपेज में काठमांडू और किराया भी 1400 होने के कारण पर्यटकों और अन्य यात्रियों के लिए यह बस काफी डिमांड में थी। जिससे इसमें 10 से 15 दिन पहले एडवांस सीट की बुकिंग होने लगी थी। एक बस वाराणसी की तो दूसरी बस काठमांडू परिवहन की होती थी। वाराणसी, आजमगढ़, गोरखपुर और सुनौली बॉर्डर के बाद सीधे बस काठमांडू ही रुकती थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुलिस लाइन से इस सेवा का शुभारंभ किया था।
पर्यटकों और यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वाराणसी-काठमांडू के बीच जनरथ एसी बस चलाने का प्रस्ताव बनाया गया है। फिलहाल कोरोना का कुछ असर समाप्त होने के बाद बस सेवा शुरू कर दी जाएगी। - एसके राय, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज, वाराणसी परिक्षेत्र