मौके पर मौजूद पुलिस बल।
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एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई
बीते आठ अक्तूबर को एसडीएम सदर प्रभास कुमार ने शम्म ए हुसैनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। इसके लिए प्रबंधन को एक हफ्ते की मोहलत दी गई थी। उपजिलाधिकारी ने यह फैसला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के नियमों के हवाले से दिया था।
इस नियम के तहत गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में किसी तरह के पक्के निर्माण पर पूरी तरह रोक है। एसडीएम ने अपने आदेश में कहा था कि एनजीटी के तय मानक की अनदेखी की गई है। साथ ही गंगा से सटे हास्पिटल का पक्का निर्माण कराया गया है।
डेढ़ एकड़ में बना था हास्पिटल एवं ट्रामा सेंटर
शहर से सटे हमीद सेतु के पास स्थित शम्म-ए- हुसैनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर का कैंपस डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है। कैंपस में नर्सिंग कॉलेज, हॉस्टल, कैंटीन सहित रेस्टोरेंट और एटीएम आदि संचालित हो रहे थे। यहां 100 से अधिक पैरा मेडिकल के छात्र पढ़ाई कर रहे थे। बीते आठ अक्तूबर 2020 को एसडीएम सदर प्रभाष कुमार की कोर्ट ने अवैैध रूप से बने इस हास्पिटल के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था।
जिस पर हास्पिटल संचालक हाईकोर्ट चले गए। वहां से डीएम कोर्ट में वाद दाखिल करने का आदेश जारी हुआ। डीएम एमपी सिंह ने एक बोर्ड का गठन कर दो दिनों तक मामले की सुनवाई करने के बाद अंतत: संचालक का आवेदन खारिज कर दिया।
फैसले के बाद देर रात को हास्पिटल खाली कराने एवं भर्ती मरीजों को अन्यत्र भेजने के लिए नोटिस जारी किया गया। पूरी रात हॉस्पिटल सहित पूरे कैंपस को खाली करने का कार्य जारी रहा। मरीजों को अलग-अलग स्थानों पर भर्ती कराया गया।