बक्सर युद्द से जुड़ा शिलालेख
23 अक्तूबर 1764 में यहां अवध के नवाब शुजाउद्दौला, मुगल सम्राट शाह आलम एवं बंगाल के नवाब मीर कासिम की संयुक्त सेना के साथ युद्ध हुआ था। अंग्रेजी फौज का नेतृत्व हैक्टर मुनरों कर रहा था। शाहाबाद गजेटियर के अनुसार इस युद्ध में अंग्रेजी फौज ने 28 बंदूकों का प्रयोग किया।
उनके पास 847 यूरोपियन, 5397 देसी सैनिक तथा 918 मुगल घुड़सवार थे। अर्थात कुल मिलाकर 7,072 सैनिकों के बल पर अंग्रेजों ने यह युद्ध जीत लिया। संयुक्त सेना के 2000 सैनिक मारे गए। बड़ी संख्या में हताहत हुए। ब्रिटिश सेना के 39 यूरोपियन, 250 देसी सैनिक मारे गए। 72 यूरोपियन, 435 देसी सैनिक घायल हुए।
युद्ध का परिणाम यह रहा कि बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हो गई। इस युद्ध स्थल से कुछ दूरी पर एक मजार है। जिसे मुगल सैनिकों की याद में बनाया गया था। कुछ लोग यह भी बताते हैं कि यहां पहली बार युद्ध में बंदूकों का प्रयोग हुआ था।
वर्तमान में यह स्थान कथकौली के लड़ाई का मैदान के रूप में जाना जाता है। पिछले दो दशक में यहां दो बार जीर्णोद्धार कार्य हुआ है। पहली दफा यहां चारदीवारी बनाई गई। हाल के वर्षों में एक नया व ऊंचा स्तूप बनाया गया है, जिसे आप तस्वीरों में देख सकते हैं।