धनतेरस, दीपावली और डाला छठ के बाद देव दीपावली कारोबारियों के लिए एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है। कारोबारियों को एक दिन के इस बाजार का बेसब्री से इंतजार रहता है।
सिर्फ एक दिन में काशी के अलावा देश-विदेश के लोग रोशनी के महाकुंभ की छटा निहारने यहां आते हैं और जमकर खरीदारी करते हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी बनारसी साड़ी, ऐंटिक सामानों की होती है। यही नही खान-पान की दूकानें भी गुलजार रहती हैं।
धनतेरस बाजार के बाद देव दीपावली का कारोबार वृहद रूप लेता जा रहा है। देव दीपावली का अलौकिक दृश्य देखने के लिए अच्छी खासी तादाद विदेशी पर्यटकों की होती है।
आदि केशव घाट से लेकर रविदास घाट की सीढ़ियों से गंगा की लहरों तक जगमग दीपक की सतरंगी छटा, आसमान से आतिशी नजारों के बीच झरती गुलाब की पंखुड़ियों को निहारने के लिए विश्व पटल पर भारी होड़ रहती है।
तमाम बड़ी कंपनियां भी इसमें शिरकत करती है। ऐसे में बाजारों की रौनक और भी बढ़ने की आस लगाए कारोबारी बैठे हैं। देव दीपावली के लक्खा मेले में उमड़ने वाली भीड़ के चलते रिक्शा-आटो वालों की भी चांदी कटती है।
गंगा घाट तक ही नही देव दीपावली का यह लक्खा मेला अब कुंडों, सरोवरों एवं गली-कूचों में भी भव्य रूप लेता जा रहा है। समूचा बनारस इस दिन दियों की रोशनी से जगमगाता है। बनारसी परिधानों की बिक्री को लेकर कारोबारी खासा उत्साहित है। पिछले साल के अनुभवों के आधार पर कारोबारियों का कहना है कि देव दीपावली का बाजार सालाना 15-20 प्रतिशत बढ़ रहा है।
एक नजर संभावित कारोबार पर
demo pic
मोम-15 हजार से अधिक, मोमबत्ती-35 हजार से अधिक, दीया बाती-40 हजार से अधिक, सरसों तेल-आठ लाख से अधिक, मिट्टी दीपक-ढाई लाख से अधिक, आतिशबाजी-80 लाख से अधिक, माला-फूल-60 लाख से अधिक, वुलेन कपड़े-35 लाख से अधिक, होम फर्निशिंग-35 लाख से अधिक।
मीठी सुपाड़ी-चार लाख से अधिक, सफेद चूना-दो लाख से अधिक, स्टोन आइटम-नौ लाख से अधिक, सजावटी सामान-25 लाख से अधिक, टूर एंड ट्रैवेल्स-तीन करोड़ से अधिक, बनारसी परिधान-सात करोड़ से अधिक, घाटों पर दीपदान-दो लाख से अधिक, खान.पान सामग्री-10 करोड़ से अधिक।
आर्टिफिशियल माला-35 लाख से अधिक, पीतल बर्तन व मूर्तियां-80 लाख से अधिक, गंगा आरती के कैसेट-पांच लाख से अधिक, घाटों की रंगाई पर खर्च-12 लाख से अधिक, लकड़ी व अन्य खिलौना, 60 लाख से अधिक, होटल, रेस्टोरेंट व लॉज-18 करोड़ से अधिक।
मोटरवोट, नौका व बजड़ा-12 करोड़ से अधिक, घाटों पर चूना पेंट, रंगोली-80 हजार से अधिक, सजावटी सामान व विद्युत झालर-तीन लाख से अधिक, रुद्राक्ष, स्फटिक मोती आदि की माला-40 लाख से अधिक ।
नोट-विभिन्न बाजारों से मिले अनुमानित आंकड़ों के आधार पर रुपये में।