सिटी ऑफ म्युजिक का दर्जा प्राप्त शहर वाराणसी आज शाम एक साथ दो शानदार उत्सवों का साक्षी बनेगा। फागुन की विदाई और चैत्र के स्वागत में काशी की संगीत परंपरा का जलोत्सव बुढ़वा मंगल अस्सी घाट पर आज की शाम बनारसी अंदाज में मनाया जाएगा।
यह जलोत्सव शहनाई के शंहशाह भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को समर्पित है। आज उस्ताद का जन्मदिन है। मशहूर गायिकाएं दादरा, ठुमरी, होरी, चैती की बंदिशों से इस मौके को यादगार बनाएंगी।
इस अनूठे संगीतोत्सव के लिए नावों-बजड़ों की गंगा की जलधारा में कतार लगेगी। इस बार का बुढ़वा मंगल शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को समर्पित है। दर्शकों की सुविधा के लिए अस्सी घाट की सीढ़ियों पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई है।
गेंदा, गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा के बीच बुढ़वा मंगल का आगाज बजड़े पर सजे भव्य मंच पर होगा। इसके लिए 10 बजड़े सजाए जाएंगे। समारोह की शुरुआत होगी शहनाई वादन से। सबसे पहले बनारस घराने के कलाकार संजीव शंकर और अश्विनी शंकर का शहनाई वादन होगा।
इनके बाद पद्मविभूषण गिरिजा देवी की शिष्या मानसी मजूमदार का गायन होगा। बता दें कि फूलों-लड़ियों से सजी नावें-बजड़े, उस पर बिछी चांदनी-मसनद, शमादान, झंडियां, गलीचे बिछाकर गंगा की लहरों के बीच संगीत की महफिलें सजाने वाले बनारस के जलोत्सव को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कराने की पहल एक बार फिर शुरू हो गई है।
बुढ़वा मंगल को यूनेस्को की इस सूची में शामिल कराने के लिए संस्कृति विभाग तीसरी बार दस्तावेजीकरण करा रहा है। इस संगीत मेले के अनूठेपन का वर्णन जेम्स प्रिंसेप से लेकर भारत के वायसराय रहे डफरिन की पत्नी ने भी किया है।