Budget 2025 : खिलौना उद्योग को देश में हब बनाए जाने से वाराणसी समेत पूर्वांचल के जीआई पंजीकृत खिलौना जगत के शिल्पियों में खुशी है। वाराणसी समेत पूर्वांचल में विभिन्न तरह के खिलौने तैयार किए जाते हैं।
इसमें जीआई पंजीकृत वाराणसी के लकड़ी, मेटल, मिट्टी के खिलौने, गाजीपुर के जूट खिलौने समेत चुनार ग्लेज्ड मिट्टी खिलौना, निजामाबाद आजमगढ़ के ब्लैक पॉटरी के खिलौने, गोरखपुर टेराकोटा खिलौनों को नया अवसर मिलेगा। यह फिर से एक नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे। भारतीय खिलौनों की विदेश की सरजमीं पर भी धाक जमेगी।
जीआई मैन कहे जाने वाले डॉ. रजनीकांत ने बताया कि वर्तमान में इन पांच जिलों के ढाई हजार शिल्पियों की ओर से अलग-अलग खिलौना उद्योग से 20 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया जा रहा है।
अब निर्यात में भी तेजी आएगी क्योंकि सरकार और निर्यातकों के प्रयास से इस खिलौना क्राफ्ट में भी नए प्रशिक्षण, इनोवेश और विभिन्न डिजाइनों पर पैकेजिंग के साथ काम होगा और इसमें भी बिना गारंटी के ऋण और स्टार्टअप आने से कारोबार बढ़ेगा।
इसी प्रकार हथकरघा वस्त्रों के उपकरणों और स्वदेशी वस्त्रों पर जोर दिया गया है और जीआई पंजीकृत बनारस ब्रोकेड साड़ी सहित मऊ साड़ी, गोरखपुर हैंडलूम के साथ-साथ मिर्जापुर की पंजा दरी और लूम से तैयार कार्पेट भी नए मुकाम को हासिल करेंगे।
लकड़ी खिलौना के पद्मश्री सम्मानित गोदावरी सिंह ने बताया कि बनारसी लकड़ी खिलौने की मांग देश ही नहीं बल्कि विदेश तक में भी है। बजट में इसे हब बनाए जाने की घोषणा हुई है तो यह उद्योग और बढ़ेगा। नए युवा हस्तशिल्पी इस क्षेत्र में आएंगे। अब तक कोई प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण नई पीढ़ी इससे दूर होती जा रही है। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के इस फैसले ने खिलाैना उद्योग को जिंदा कर दिया है।
नेशनल मेरिट अवॉर्डी रामेश्वर सिंह, स्टेट अवॉर्डी धर्मराज खरादी, अमृता देवी, बिहारी अग्रवाल, अनिल कसेरा, मनोज सिंह, कैंसर जहां, जमालुदीन अंसारी, बच्चे लाल मौर्या, अवधेश कुमार ने आम बजट में वित्त मंत्री के इस घोषणा पर खुशी जताई और कहा कि वाराणसी समेत पूर्वांचल के इस खिलौना कारोबार को और उड़ान मिलेगी।