आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडियोथेरेपी, हिमेटोलॉजी, न्यूरो सर्जरी और बाल रोग विभाग में ही हर साल 20 हजार से अधिक कैंसर के प्रारंभिक लक्षण वाले पीड़ित आते हैं। सभी रोगियों को सस्ती दवाइयों से राहत मिलेगी।
कैंसर की दवाओं के सस्ता होने का लाभ वाराणसी सहित पूर्वाचल के करीब 50 हजार से अधिक मरीजों राहत मिलेगी। ये सालभर से इलाज कराते हैं। कैंसर पीड़ितों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। सर्जरी के लिए 15-30 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी, रेडियोथेरेपी, हिमेटोलॉजी, न्यूरो सर्जरी और बाल रोग विभाग में ही हर साल 20 हजार से अधिक कैंसर के प्रारंभिक लक्षण वाले पीड़ित आते हैं।
विज्ञापन
इसी तरह महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान और होमी भाभा कैंसर अस्पताल लहरतारा में भी वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से भी करीब 20 हजार कैंसर पीड़ित इलाज, सर्जरी आदि के लिए आ रहे हैं।
10 हजार से कैंसर पीड़ित निजी अस्पतालों/कैंसर संस्थान में इलाज करा रहे हैं। शरीर के अंगों में कैंसर का प्रभाव कम हो, इसलिए डॉक्टर की सलाह पर मरीजों को नियमित जांच के साथ ही दवाइयों का सेवन करना जरूरी होता है। कैंसर की दवाएं महंगी होती हैं।
विज्ञापन
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अगर किसी को मुंह का कैंसर तो एक साल तक दवा चलती है। ब्लड कैंसर में जीवन भर, फेफड़े के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर में तो 5 से 10 साल तक दवाइयां चलानी पड़ती हैं। कैंसर की दवाओं पर हर महीने न्यूनतम 10 हजार रुपये खर्च होते हैं। अब सरकार ने कुछ दवाइयों के दाम कम करने की घोषणा की है। इसका लाभ पीड़ितों को मिलेगा। -प्रो मनोज कुमार पांडेय, सर्जिकल आंकोलॉजी बीएचयू