पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह को मिला सम्मान।
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उधर, सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी विहार में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग) तथा महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया, सारनाथ के संयुक्त तत्वावधान में "धम्मचक्क पवत्तन दिवस का महत्व" विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सारनाथ को वैश्विक बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
जयवीर सिंह ने कहा कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ की वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है। यह भारत का 45वां तथा उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बना है। लगभग 28 वर्षों बाद मिली इस उपलब्धि से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है और पूर्वांचल को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि इससे धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी और दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं का आकर्षण सारनाथ की ओर बढ़ेगा।
कार्यक्रम में महापंडित राहुल सांकृत्यायन द्वारा मूल पाली से संस्कृत में अनूदित धम्मपद तथा प्रो. सिद्धार्थ सिंह की पुस्तक "युगपुरुष कोसेत्सु नोसु को स्मरण करते हुए" का लोकार्पण भी किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह, वेन. के. सिरी सुमेधा थेरो, प्रो. आर.एम. पाठक, तरुणेश बौद्ध, प्रो. उज्ज्वल कुमार, प्रो. सिद्धार्थ सिंह सहित अनेक विद्वानों ने भगवान बुद्ध के धम्म, करुणा और अहिंसा के संदेश पर अपने विचार रखे।
आयोजकों ने बताया कि संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित होंगे, जिनमें देश-विदेश के शोधकर्ता और बौद्ध विद्वान धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के महत्व तथा बौद्ध दर्शन के विभिन्न आयामों पर शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। इन सत्रों में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, नवनालंदा महाविहार, सीआईएचटीएस और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वान भाग लेंगे। कार्यक्रम का समापन चर्चा, निष्कर्ष और आभार ज्ञापन के साथ होगा।