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पर्यटन विभाग की अनदेखी से बदहाल स्थिति में सारनाथ का बुद्धा थीम पार्क

Wed, 27 Sep 2017 04:37 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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सारनाथ - फोटो : self
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वाराणसी के सारनाथ में स्थित बुद्धा थीम पार्क में पर्यटन विकास की योजनाएं स्थानीय स्तर पर जिम्मा संभालने वाले विभागों की लापरवाही से रफ्तार नहीं पकड़ पा रही हैं। प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण के बाद भी यह पार्क अब तक जनोपयोगी नहीं बन पाया है। वजह, उत्तर प्रदेश पर्यटन की लापरवाही।
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यूपी पर्यटन की ओर से पार्क में फर्नीचर और फर्निशिंग का काम अब तक कराया जा सका है। ऐसे ही गंगा घाटों पर पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए लगवाए गए बेंच, छतरियां और स्नान घर भी देखरेख के अभाव में बदहाल हो गए हैं। इनमें कुछ गायब हो गए हैं तो कुछ क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 

दरअसल, पर्यटन विकास की योजनाएं बनाने में यूपी पर्यटन, नगर निगम सहित अन्य विभाग जितनी तत्परता दिखाते हैं, उतनी दिलचस्पी योजनाओं के कार्यान्वयन और पूरी हो चुकी योजनाओं के रखरखाव में नहीं दिखाते। पर्यटन विकास पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।
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प्रसाद योजना के तहत बुद्धथीम पार्क को 256.39 लाख की लागत से विकसित कराया गया है। सिर्फ फर्नीचर और फर्निशिंग का काम बाकी है, जो उत्तर प्रदेश पर्यटन को कराना है।

पर्यटन विभाग ने मेगा डेस्टिनेशन प्रोजेक्ट के तहत नगर निगम के सहयोग से घाटों पर बेंच, स्नान घर, छतरियां आदि लगवाने पर 312.87 लाख रुपये खर्च किए लेकिन उसकी देखरेख की जरूरत नहीं समझी।

पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि नई योजनाएं बनाने के बजाए जरूरी है कि जो योजनाएं संचालित हैं, उन्हें प्राथमिकता के तौर पर पूरा कराया जाए और बाकायदा उनकी देखरेख की जिम्मेदारी तय की जाए। 

मामले में संयुक्त निदेशक पर्यटन अविनाश चंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रसाद योजना के तहत संचालित कार्य पूरे कर लिए गए हैं। बुद्धा थीम पार्क में फर्निशिंग के लिए जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। घाटों पर बेंच और छतरी आदि की मौजूदा स्थिति की जांच कराई जाएगी। विश्व पर्यटन दिवस पर अतिथि देवो भव: की तर्ज पर सैलानियों का भारतीय परंपरानुसार स्वागत होगा।
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‘पवन हंस’ पर भी पेच 

helicopter - फोटो : अमर उजाला
सैलानियों को काशी का हवाई सैर कराने के लिए पवन हंस हेलीकाप्टर के संचालन की योजना में भी पेच फंस गया है। इसका संचालन पहले सारनाथ से किया जाना था, बाद में इसके लिए रामनगर में जमीन ढूंढी जाने लगी।

फिर अधिकारियों ने सारनाथ से ही इसके संचालन की तैयारी कर दी। तकनीकी एक्सपर्ट ने जब सारनाथ का जायजा लिया तो पाया कि एक तरफ टॉवर दूसरी तरफ ऊंची बिल्डिंग के चलते यहां से उड़ान भरने में दिक्कत होगी। उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में है।

इसके अलावा प्रसाद योजना के तहत क्रूज संचालन के अलावा कलाधाम बनाने, राजघाट-आदिकेशव घाट के सौंदर्यीकरण, पंचक्रोशी धर्मशालाओं की मरम्मत, अस्सी घाट पर लाइट एंड साउंड शो आदि के लिए 483 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। 
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