विधानसभा चुनाव 2017 में बसपा का फोकस पूर्वांचल की सुरक्षित सीटों पर है। 2012 में पार्टी को पूर्वांचल के 10 जिलों की 13 सुरक्षित सीटों में सिर्फ एक सीट पर जीत नसीब हुई थी। 12 सीटें सपा के खाते में गई थीं। प्रदेश में कुल 85 सीटों में से 13 सीटें ही बसपा के खाते में गई थी।
कई सीटों के प्रत्याशी मतों के बड़े अंतर से पराजित हुए थे। इस बार बसपा सुप्रीमो का फोकस सामान्य सीटों के साथ ही सुरक्षित सीटों पर भी है।
2012 में वाराणसी की अजगरा सीट को छोड़कर चंदौली में चकिया, गाजीपुर में सैदपुर एवं जखनियां, जौनपुर में केराकत तथा मछलीशहर सीट नहीं जीत पाई थी।
सिर्फ अजगरा में बसपा को जीत मिली थी। मऊ के मोहम्मदाबाद-गोहना, बलिया में बेल्थरा रोड और आजमगढ़ की मेहनगर एवं लालगंज सीट भी सपा के खाते में गई थी। मिर्जापुर की छानबे और भदोही की औराई सीट पर भी सपा का कब्जा रहा।
वहीं सोनभद्र में दु्द्धी सीट पर निर्दल रूबी प्रसाद का जीत नसीब हुई थी। बाद में वह भी सपा में शामिल हो गई थी। वहीं जिले में पहले सामान्य सीट रही ओबरा और सुरक्षित सीट दुद्धी को अनुसूचित जन जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि सामान्य सीटों पर पार्टी प्रत्याशी और पदाधिकारी मेहनत करते ही हैं लेकिन सुरक्षित सीटों पर कम ध्यान देने से पार्टी को दिक्कत आई थी।
इसी के मद्देनजर पार्टी मुखिया के निर्देश पर एक साल पहले ही भाईचारा कमेटी का गठन कर ऐसी सीटों पर बैठकें और कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए तैयारी शुरू कर दी गई थी।