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Education: चार साल से दो विवि, एक कॉलेज में बीएससी एजी की सीटें फुल; अन्य कोर्स में विद्यार्थियों की तलाश

Wed, 24 Jul 2024 06:08 PM IST
अमन विश्वकर्मा पंकज चौबे, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: इन काॅलेजों में एडमिशन के लिए अब तक 10 हजार आवेदन हो चुके हैं। सीटों की संख्या 529 है। जबकि बीएचयू से लेकर राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में सीटें भर पाना भी मुश्किल हो गया है। 
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BHU - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक तरफ जहां योग्य अभ्यर्थियों की कमी के चलते बीएचयू से लेकर राज्य विश्वविद्यालयों तक विभिन्न पाठ्यक्रमों की सीटें भर पाना कठिन हो गया है, वहीं बीएससी एजी में प्रवेश के लिए लंबी कतार लगी है।

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मेडिकल साइंस के विकल्प के रूप में उभरे बीएससी कृषि पाठ्यक्रम में पिछले चार साल से वाराणसी के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में सीटें खाली नहीं जा रहीं हैं। बीएचयू और यूपी कॉलेज में बीएससी एजी का क्रेज पहले से ही रहा है, अब काशी विद्यापीठ में प्रवेश लेने के लिए भी कतार लंबी होने लगी है।

बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में संचालित बीएससी एजी पाठ्यक्रम में 204 सीटें हैं। इनमें से 50 सीटें राजीव गांधी साउथ कैंपस बरकछा में हैं। इसके अलावा 30-30 सीटें बीटेक इन फूड टेक्नोलॉजी और बीटेक इन डेयरी टेक्नोलॉजी की हैं। यहां प्रवेश सीयूईटी के स्कोर के आधार पर दिया जाता है। 
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बीएचयू में बीएससी एजी में प्रवेश के लिए मारामारी रहती है। पिछले वर्षों में इन 204 सीटों के लिए आवेदनों की संख्या 15 हजार के ऊपर ही रही। इस बार अब तक सीयूईटी का परिणाम नहीं आया है। सत्र 2024-25 के लिए एमएससी एजी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में बीएचयू की 1312 में से लगभग 950 सीटों पर दाखिला हो चुका है। पीजी में दाखिला प्रक्रिया अभी चल रही है।

यूपी कॉलेज में पिछले वर्ष 25 प्लेसमेंट
पूर्वांचल के राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि विज्ञान की पढ़ाई के लिहाज से यूपी कॉलेज को प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस बार कॉलेज में आए यूजी-पीजी के कुल 7000 आवेदनों में से अकेले बीएससी और एमएससी एजी में करीब 2000 आवेदन हुए हैं। 

यूपी कॉलेज में बीएससी एजी में 165 और एमएमसी एजी में 59 सीटें हैं। पिछले वर्ष कृषि विज्ञान के 25 छात्र-छात्राओं को सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में जॉब प्लेसमेंट मिला। 

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता और इन्फ्रास्ट्रक्चर के अलावा यहां गरीब बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने का प्रयास रहता है। 4000 रुपये सेमेस्टर और 8000 रुपये वार्षिक शुल्क में बीएससी एजी की पढ़ाई किसी अन्य संस्थान में नहीं होती। कहा कि मेरा इरादा फीस बढ़ाने का है भी नहीं। यूपी कॉलेज में एजी के कोर्स इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (आईसीएआर) से मान्यता प्राप्त हैं।
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काशी विद्यापीठ में 160 पेड सीटों पर 518 आवेदन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुल 64 पाठ्यक्रमों में से दो तिहाई पाठ्यक्रमों में सीटों के दोगुने से कम आवेदन आए हैं। कई पाठ्यक्रमों में सीटों से भी कम आवेदन हैं। मगर, बीएससी एजी 160 सीटों के मुकाबले 518 आवेदन हुए हैं। जबकि काशी विद्यापीठ में रेगुलर सीटें नहीं हैं, सभी पेड सीटें हैं।

मेडिकल का विकल्प बन गई है कृषि विज्ञान की पढ़ाई
कृषि विज्ञान की पढ़ाई के लिए हाल के वर्षों में छात्र-छात्राओं के बीच मांग बढ़ी है। पिछले कुछ वर्षों में बीएससी एजी में प्रवेश लेने के लिए मारामारी बढ़ी है। अमूमन मेहनत के बावजूद नीट में सफल न हो पाने वाले विद्यार्थी बीएससी एजी की तरफ रुख करते हैं। इससे यह मेडिकल का एक विकल्प भी बनकर उभरा है। - प्रो. भास्कर भट्टाचार्य, चेयरमैन सीएसी, बीएचयू

केस- 1
अवंतिका और अभिनव दुबे के पिता बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में चिकित्सक हैं, लेकिन भाई-बहन कृषि में अपना भविष्य देख रहे हैं। अवंतिका बीएचयू के कृषि विज्ञान संकाय में बीएससी एजी की चतुर्थ वर्ष की छात्रा हैं और अभिनव तृतीय वर्ष के छात्र।

केस- 2
बीएससी एजी चतुर्थ वर्ष के छात्र राजस्थान निवासी रवींद्र सिंह मीना के पिता किसान हैं। उनका एक बड़ा भाई एनआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है तो दूसरा भाई एमबीबीएस का छात्र है। लेकिन, रवींद्र ने कृषि विज्ञान में सुनहरे भविष्य का सपना देखा है। उनका कहना है कि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में प्लेसमेंट और जॉब की कमी नहीं है।

केस- 3
बीएचयू में बीएससी एजी तृतीय वर्ष के छात्र इफ्तिखार हसन करगिल (जम्मू-कश्मीर) के रहने वाले हैं। उनके पिता सरकारी कर्मचारी हैं। इफ्तिखार का कहना है कि कृषि विज्ञान में खाद्य पदार्थ, डेयरी, बीज, फसल, प्रबंधन समेत ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां कॅरिअर के विकल्प बन रहे हैं।
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