चंदौली जिले के सैयदराजा-जमानिया राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरहनी गांव में अंग्रेजों के जमाने का बना एतिहासिक स्तूप आज भी प्राचीन विरासत का अहसास करा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो स्तूप बनवाने से पूर्व अंग्रेजों ने यहां पर किसी महिला की बलि भी दी थी।
अंग्रेजों के जमाने में यह स्तूप डाक चौकी का काम करता था। उसे लोग आज भी यहां मक्तूल भवानी के नाम से पूजते हैं। बरहनी में ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विद्यमान 90 फुट ऊंची इस डाक चौकी की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। गांव के वृद्धों की मानें तो इस स्तूप के ऊपर से अंग्रेजी शासक पूरे क्षेत्र का दूरबीन से मुआयना करते थे।
स्तूप के चारों तरफ गोलाकार रूप में काफी दूर में विद्यमान मिट्टी के टीले से अंग्रेजों को स्तूप पर चढ़ने में मदद मिलती थी। अब रख-रखाव के अभाव में बारिश के पानी से धीरे-धीरे स्तूप के आसपास का मिट्टी का टीला कटता जा रहा है। टीलों पर झाड़-झंखाड़ और घासफूस उग गए हैं। वर्तमान में यह स्तूप सांपों और बिच्छुओं का अड्डा बन चुका है।
पहले मिट्टी से ढंका रहने वाले स्तूप का ऊपरी भाग अब दूर से ही दिखाई देने लगा है। इस ऐतिहासिक धरोहर का ध्यान न रखे जाने से यह प्राचीन स्तूप जीर्ण-शीर्ण होता जा रहा है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में इस ऐतिहासिक धरोहर का नामोनिशान ही मिट जाएगा।