उन्होंने कहा कि भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य द्वारा सपा के कई सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने संबंधी बयान को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। लखनऊ में समाजवादी पार्टी की ओर से आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन पर कटाक्ष करते हुए राजभर ने कहा कि देश में सबसे अधिक विद्वान ब्राह्मण समाज है, अब अहीर ब्राह्मण को समझाएगा क्या?
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में विभिन्न वर्गों के नेताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया जाता तथा उन्हें अपमानित किया जाता है। राम मंदिर निर्माण में चंदे के कथित घोटाले को लेकर सपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए राजभर ने कहा कि जांच में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनमें समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका चर्चा में है।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर विवाद में सपा से जुड़े नाम क्यों सामने आते हैं। प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी अपराधियों को संरक्षण देने की राजनीति करती रही है।
उन्होंने मऊ, बाराबंकी और प्रयागराज की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सपा शासन पर अपराध और राजनीति के गठजोड़ का आरोप लगाया। हाल ही में दिए गए अपने ‘गढ़ को गड़ही बना देंगे’ वाले बयान पर सफाई देते हुए राजभर ने कहा कि उनका आशय समाजवादी पार्टी के राजनीतिक किले को ध्वस्त करने से था।
उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी और सरकार ने पूर्वांचल में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने वे कार्य किए हैं, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकारें वर्षों में नहीं कर सकीं।
अखिलेश यादव द्वारा उन पर भाजपा के लिए पैरवी करने के आरोपों को खारिज करते हुए राजभर ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के पक्ष में भीषण गर्मी में प्रचार किया था, जबकि अखिलेश यादव मैदान में सक्रिय नहीं रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक ताकत की उपेक्षा की गई और उन्हें सम्मान नहीं मिला, जिसके चलते उन्होंने अलग राह चुनी। राजभर ने दावा किया कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे और समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आएगा।