हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ है, लेकिन मौखिक टिप्पणी में पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि सलेम की रिहाई का मामला इस समय विचारणीय नहीं है। सलेम की ओर से अधिवक्ता फरहाना शाह के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2005 में जब उसे पुर्तगाल से भारत लाया गया था, तब यह आश्वासन दिया गया था कि उसे न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 वर्ष से अधिक की सजा होगी। इसी आधार पर उसने अपनी रिहाई की मांग की थी।
वहीं, केंद्र सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अबू सलेम अभी तक करीब 19 वर्ष ही जेल में बिता पाया है और उसकी समय से पूर्व रिहाई पर निर्णय प्रक्रिया अभी लंबित है।
गौरतलब है कि अबू सलेम 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी करार दिया जा चुका है और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल उसकी रिहाई की संभावना टल गई है।