परिजनों से पूछ ताछ करते पुलिस अधीक्षक।
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मिर्जापुर में नक्सल प्रभावित गढ़वा के जंगल में सोमवार को अलग-अलग पेड़ों से लटक रहे पति-पत्नी के शव मिलने से सनसनी फैल गई। दोनों के शव आधा किलोमीटर की दूरी पर मिले। बताया गया कि वे घर से किसी ओझा के यहां गए थे। युवक के पिता ने तहरीर देकर हत्या की आशंका जताई है।
डाग स्क्वाड के साथ एसपी ने भी घटना स्थल की छानबीन की। शीतलगढ़ निवासी मिट्ठू (28) तथा उसकी पत्नी उषा (24) झाड़-फूंक कराने पड़ोस के गजरिया गांव में एक ओझा के यहां आते-जाते थे। ओझा के बुलाने पर तीन नवंबर की शाम मिट्ठू उषा को लेकर साइकल से वहां जाने के लिए निकला था।
शनिवार की सुबह तक घर नहीं लौटा तो लोगों ने उसकी खोजबीन शुरू की। रविवार की सुबह तक सभी रिश्तेदारों के यहां पता लगाया लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला।
सोमवार की सुबह गढ़वा के जंगल में ग्रामीणों ने मिट्ठू का शव महुआ के पेड़ में बधे दुपट्टे से झूलता देखा जबकि वहां से आधा किमी दूर उसकी पत्नी का शव चिलबिल के पेड़ से उसकी साड़ी से लटक रहा था। इस पर ग्राम प्रधान के पति भगवान दास को सूचना दी गई।
प्रधानपति की सूचना पर मड़िहान एवं पटेहरा चौकी पुलिस ने दोनों शवों को पेड़ से नीचे उतरवा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में एसपी आशीष तिवारी भी पहुंचे और करीब एक घंटे तक डाग स्क्वाड के साथ छानबीन की। उन्होंने ग्रामीणों से भी घटना के बारे जानकारी ली।
पुलिस की सूचना पर परिवार वाले मौके पर पहुंचे। युवक के पिता जोखी ने दोनों की हत्या करके शव लटकाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। परिवार वालों का कहना है कि यदि उन्होंने आत्महत्या की होती तो इतनी दूर जाने की जरूरत क्या थी? लोगों ने ओझा पर भी संदेह जताया है।
मिट्ठू को चार साल की लड़की सपना है, जिससे उषा दो घंटे बाद ही लौटने को कहकर गई थी। पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने कहा कि नक्सल गांव गढ़वा के जंगल से पति पत्नी का शव पेड़ से लटकता हुआ मिला है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवा दिया गया है। जांच और पीएम रिपोर्ट आने पर ही साफ होगा कि यह आत्महत्या या हत्या है।