वाराणसी स्थित सारनाथ के मिनी में जू में रखे गए एक काले हिरन की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। वह पिछले डेढ़ साल पहले सारनाथ के मिनी जू में लाया गया था। अब चिड़ियाघर में एक की मौत के बाद सिर्फ पांच हिरन बचे हैं। इसके अलावा 120 चीतल की प्रजाति के भूरे रंग के हिरन हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी महावीर कौजलगी ने बताया कि सारनाथ के मिनी जू में डेढ़ साल पहले काले हिरन को लाया गया था। उसकी रविवार को अचानक मौत हो गई। जांच के लिए चिरईगांव ब्लॉक के पशुचिकित्सक को सूचित किया गया। उधर, पशुचिकित्सक डॉ. रामधार चौधरी ने बताया कि हिरन की मौत कार्डिएक अरेस्ट (हृदय गति रुकने) के कारण हो गई थी। उसकी उम्र लगभग 14 वर्ष पूरी हो चुकी थी। अमूमन काले हिरन की उम्र 14 से 15 वर्ष तक होती है। हालांकि जो जंगल में होते है उनकी उम्र 16 वर्ष तक होती है।
मुन्ना नाम से पुकारते थे वनकर्मी