पीएम मोदी और शाह की लगातार सभाएं चुनावी आगाज
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पांच अगस्त को मुगलसराय नाम अपना अस्तित्व खो रहा था तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति की आभा निखर रही थी। बाकले खेल मैदान में मंत्रियों व सांसदों ने एकात्मवाद से शुरू की बात राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तक पहुंच गई। इसे एकात्मवाद और राष्ट्रवाद से जोड़कर 2019 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी यहीं से मोड़ दिया।
मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन कर दिया गया। पांच अगस्त को इस नए नाम का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम के शुरू पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद व मानवतावाद से शुरु हुई। मंत्री ने रेल के विस्तर व विकास को एकात्मवाद व अन्त्योदय से जोड़ा। इसके साथ ही राजनीतिक हमले भी शुरू हो गए।
वक्ताओं ने पिछले सरकारों के नाकामियों को गिनाया। इसके बाद मुख्य अतिथि अमित शाह ने अपनी बात पंडित दीनदयाल व मुग़लसराय से शुरू की उसके वह विपक्षी दलों पर हमलावर हो गए। मुद्दा ओबीसी व एनआरसी का छेड़ दिया। ममता तथा राहुल गांधी को निशाने पर ला दिया। एनआरसी मुद्दे पर उनको खींचने लगे।
एनआरसी का मुद्दा उठाकर श्री शाह ने राष्ट्रवाद का जज्बा लोगों भरने की कोशिश की। उनका कहना था कि 40 लाख बंगलादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं। जिसका समर्थन ममता कर रही हैं। जनता से इस मुद्दे पर हामी भराई। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्मवाद को जोड़ा कहा कि उन्हीं के आदर्शो को आत्मसात करते केंद्र व प्रदेश सरकार सबका साथ सबका विकास के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने ने एकात्मवाद व एनआरसी को साधते हुए राजनीतिक समन्वय भी तैयार किया। साथ ही लोकसभा चुनाव की राजनीति के लिए कार्यकर्ताओं को दिशा भी दे गए।