अनिल राजभर से समाज में पैठ बनाई और लोकसभा चुनाव से पहले गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा से ताकत दिखाई थी। लोकसभा चुनाव में मंच से भाजपा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पर मुख्यमंत्री ने सुभासपा अध्यक्ष को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था और उनके सभी विभाग अनिल राजभर को दे दिए थे। तभी माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा।
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वर्ष 2017 में सात बार के विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी की जगह शहर दक्षिणी से डा. नीलकंठ तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा गया। जीत के बाद उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। मंत्री बनने के बाद भी डा. नीलकंठ तिवारी आम आदमी की तरह जनता के बीच रहे।
सुबह क्षेत्र में पैदल भ्रमण और अड़ी पर चर्चा से वे जनता के संपर्क में रहे। उनकी मेहनत के चलते उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का प्रमोशन दिया गया। दूसरी तरफ राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बने शहर उत्तरी विधायक रविंद्र जायसवाल ने लगातार दूसरी बार विधायक बनने हैं। रविंद्र जायसवाल ने वेतन नहीं लेने वाले प्रदेश के पहले विधायक हैं। इसके अलावा भत्तों को विकास कार्य में खर्च किया।
अपना दल का हाथ फिर रहा खाली :
भाजपा के सहयोगी अपना दल को प्रदेश के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। केंद्र में दूसरी बार बनी मोदी सरकार में भी अपना दल को शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में अपना दल के लिए उम्मीद जगी थी। माना जा रहा था कि अपना दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और एमएलसी आशीष पटेल को मंत्री मंडल में तरजीह मिल सकती है। मगर, इस बार भी अपना दल के हाथ खाली ही रहे। उधर, भाजपा ने मिर्जापुर में रमाशंकर पटेल को राज्यमंत्री बनाकर अपना दल की मुश्किल भी बढ़ा दी है। इसके जरिए भाजपा पटेल समाज में सीधी पैठ करना चाहेगी।