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सीएम योगी का मंत्रिमंडल विस्तार : पूर्वांचल का रसूख बढ़ाया, जातीय समीकरण भी साधे, जानें कैसे

Thu, 22 Aug 2019 06:45 PM IST
गीतार्जुन गौतम शशांक मिश्र, अमर उजाला, वाराणसी
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सीएम योगी मंत्रियों के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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योगी सरकार के पहले विस्तार में पूर्वांचल का रसूख बढ़ाया गया है। मंत्रिमंडल में प्रदेश के 18 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन विधायक पूर्वांचल से हैं। बनारस के दो मंत्रियों को प्रमोशन भी दिया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार से पूर्वांचल के जातीय समीकरण साधने की भी पूरी कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार 2022 की जमीन तैयार करने के लिए बनारस को केंद्र बनाकर पूर्वांचल को साधेगी। यही कारण है कि सबसे ज्यादा बनारस को तवज्जो दी गई है। हालांकि इन मंत्रियों के सामने काशी के विकास की चुनौती होगी।

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बुधवार को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अनिल राजभर को कैबिनेट, राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी को स्वतंत्र प्रभार और शहर उत्तरी विधायक रविंद्र जायसवाल को स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री बनाया गया। इसके अलावा मिर्जापुर के मड़िहान विधायक रमा शंकर पटेल और बलिया नगर के आनंद स्वरुप शुक्ला को मंत्री मंडल में शामिल किया गया है। पूर्वांचल के दो ब्राह्मण और तीन पिछड़ा समाज के चेहरों को आगे कर जातीय समीकरण दुरुस्त किए गए हैं।

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विधानसभा चुनाव में राजभर समाज को एकजुट करने के लिए भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन किया था। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट और भाजपा विधायक अनिल राजभर को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया।

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अनिल राजभर से समाज में पैठ बनाई और लोकसभा चुनाव से पहले गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा से ताकत दिखाई थी। लोकसभा चुनाव में मंच से भाजपा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी पर मुख्यमंत्री ने सुभासपा अध्यक्ष को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था और उनके सभी विभाग अनिल राजभर को दे दिए थे। तभी माना जा रहा था कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा।

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वर्ष 2017 में सात बार के विधायक रहे श्याम देव राय चौधरी की जगह शहर दक्षिणी से डा. नीलकंठ तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा गया। जीत के बाद उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। मंत्री बनने के बाद भी डा. नीलकंठ तिवारी आम आदमी की तरह जनता के बीच रहे।
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सुबह क्षेत्र में पैदल भ्रमण और अड़ी पर चर्चा से वे जनता के संपर्क में रहे। उनकी मेहनत के चलते उन्हें राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का प्रमोशन दिया गया। दूसरी तरफ राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बने शहर उत्तरी विधायक रविंद्र जायसवाल ने लगातार दूसरी बार विधायक बनने हैं। रविंद्र जायसवाल ने वेतन नहीं लेने वाले प्रदेश के पहले विधायक हैं। इसके अलावा भत्तों को विकास कार्य में खर्च किया।

अपना दल का हाथ फिर रहा खाली :
भाजपा के सहयोगी अपना दल को प्रदेश के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। केंद्र में दूसरी बार बनी मोदी सरकार में भी अपना दल को शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में प्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में अपना दल के लिए उम्मीद जगी थी। माना जा रहा था कि अपना दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और एमएलसी आशीष पटेल को मंत्री मंडल में तरजीह मिल सकती है। मगर, इस बार भी अपना दल के हाथ खाली ही रहे। उधर, भाजपा ने मिर्जापुर में रमाशंकर पटेल को राज्यमंत्री बनाकर अपना दल की मुश्किल भी बढ़ा दी है। इसके जरिए भाजपा पटेल समाज में सीधी पैठ करना चाहेगी।
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