एनडीए सरकार ने विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 से खामियों को दूर करने का प्रयास किया है। इस कानून में जवाबदेही तय की गई है और मौसम व खेती के समय को ध्यान में रखते हुए 60 दिनों तक कार्य रोकने, 20-20 दिन के चरणों में काम कराने की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए टेक्नोलॉजी-सेंट्रिक अप्रोच अपनाई गई है। जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजिंग, रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए मोबाइल ऐप, एआई आधारित धोखाधड़ी पहचान तंत्र और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे प्रावधान किए गए हैं। मजदूरी भुगतान में देरी पर सख्त प्रावधान किए गए हैं। सात दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य है।
यदि 15 दिनों से अधिक देरी होती है तो ब्याज देना होगा। काम न मिलने की स्थिति में 125 दिनों तक रोजगार भत्ता देने की व्यवस्था भी कानून में की गई है। उन्होंने कहा कि 2006 से 2014 तक यूपीए सरकार द्वारा मनरेगा पर करीब 2 लाख 12 हजार 949 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 2014 के बाद एनडीए सरकार ने 8 लाख 48 हजार 140 करोड़ रुपये यानि चार गुना अधिक राशि खर्च कर योजनाओं को मजबूती दी।
प्रेसवार्ता में क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, सांसद अमरपाल मौर्या, कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी व सह प्रभारी संतोष सोलापुरकर मौजूद रहे।