लकुलीश के पूजन से मिलती है तंत्र और श्मशान भय से मुक्ति
भगवान शिव के 28वें स्वरूप लकुलीश के पूजन से साधक को तंत्र-भय, श्मशान भय, मृत्यु भय एवं रोग से मुक्ति मिलती है। अघोराचार्य कपाली बाबा महाराज ने बताया कि अघोर परंपरा में गुरु को शिव का स्वरूप माना गया है। लकुलीश पूजन से गुरु तत्व प्रबल होता है।
मन की चंचलता, भय, क्रोध और मोह घटते हैं, जिससे साधना दीर्घकाल तक चल पाती है। नकारात्मक शक्तियां ऊपरी बाधाएं और तांत्रिक प्रभाव शांत होते हैं। भगवान लकुलीश का पूजन दूध या गंगाजल से अभिषेक कर चंदन एवं भस्म लगा कर किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प चढ़ाने से लकुलीश प्रसन्न होते हैं।