बीजेपी सांसद संघमित्रा मौर्या ने 11 फरवरी को लोकसभा में सवाल उठाते हुए कहा कि जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश को पुन: विश्वगुरू बनाने की ओर लगातार प्रयासरत हैं। वहीं यूपी में बीएचयू में हाल ही में सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख विश्वविद्यालय परिसर के अंदर छात्रों को गोबर के उपले बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं यानी गोबर पाथने की विधि बता रहे हैं।
सांसद ने यह भी कहा कि निश्चित तौर पर बीएचयू जैसे परिसर में यदि प्रोफेसर यह विधि बताएंगे तो अन्य विश्वविद्यालयों की हम कैसे उच्च स्तर की शिक्षा की बात कर सकते हैं। इस तरह छात्रों के प्रति व्यवहार निंदनीय और चिंतनीय है।
संघमित्रा ने कहा कि ऐसे मौके पर महात्मा ज्योतिबाराव फुले की उस लाइन को भी पढ़ा, जिसमें इस बात का जिक्र है कि विद्या बिन मति गई, मति बिन नीति गई, नीति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना सूत्र हुआ। अर्थात जब एक विद्या की वजह से इतने नुकसान होते हैं तो विद्या के मंदिर में छात्र के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है। ऐसे में प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी जरूरी है।
इस संबंध में सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्र का कहना है कि सामाजिक विज्ञान संकाय के तहत समन्वित ग्रामीण विकास केंद्र के तहत छात्रों को गोबर पाथने की जानकारी दी जाती है। मेरे हिसाब से यह कहीं से गलत नहीं है। अब जिसको जो कहना है वो कहता रहे। केंद्र के तहत ग्रामीण विकास से जुड़ी हर जानकारी देना ही उद्देश्य है।